
अलवर जिले में युवा और बच्चे हम उम्र के दोस्तों व भाइयों के साथ रंग की मस्ती के साथ होली खेलते हैं। ये बच्चे और युवा बुजुर्ग महिला व पुरुषों को रंग व चंदन का तिलक लगाकर आशीर्वाद लेने की परम्परा से अब ये बच्चे दूर हैं। धुलंडी के दिन युवा ही नहीं सभी वर्गों के लोग होली के रंग लगाने की परम्परा के बाद दोपहर बाद नहाने के बाद नए कपड़े पहनकर अपने परीचितों के घर जाकर वहां बुजुर्गों से आशीर्वाद लेते थे। यह परम्परा पुरानी पीढ़ी के 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोग जिंदा बनाए हुए हैं जबकि बच्चों को इसका पता ही नहीं है।अलवर में होली का पर्व बहुत धूमधाम व मस्ती के साथ मनाया जाता रहा है। मोहल्लों से युवा एकत्रित होकर टोली के रूप में निकलते थे।
अलवर में तीन दशक पूर्व तक युवा साइकिल व पैदल टोलियों के रूप में निकलते थे। वे शहर के बहुत सी जगह जाकर अपने मित्रों को रंग लगाते थे। इनमें अधिकतर लोग तो ऐसे होते थे जिन पर इतना रंग लगा होता था कि उनकी शक्ल पहचानना भी मुश्किल होता था। अलवर में दो दशक पूर्व तक मुहं पर बिल्कुल सफेद रंग का रासायनिक कलर लगा देते थे जिसे छुड़ाने के लिए केरोसिन का सहारा लेना होता था। बुजुर्गों से लेते थे आशीर्वाद-होली पर्व पर अलवर में बुजुर्गोंे से आशीर्वाद लेकर होली खेलने की परम्परा बहुत पुरानी है। कई दशकों से चल रही यह परम्परा को नई पीढ़ी ने कम अपनाया है।
पूर्व शिक्ष अधिकारी राजाराम सोनी ने बताया कि युवा अब अपनी मस्ती में होली तो खेलते हैं लेकिन अपनी परीचित बुजुर्गों से होली पर्व पर आशीर्वाद लेने की परम्परा को भुला रहे हैं। युवा जिस भी घर में जाते थे, वहां बुजुर्ग उन्हें मुंह मीठा कराके आशीर्वाद देते थे। शहर मे कई जगह तो लोग नमकीन और पकाड़ों का इंतजाम करते थे। यही नहीं कई प्रतिष्ठित घरों में लोग सामूहिक भोज का इंतजाम करते थे।
ससुराल में होती थी आवभगत
पुराने बुजुर्ग ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में लोग धुलंडी के दिन अपनी साइकिल पर बच्चों को बैठाकर शाम को ससुराल जाते थे। यहां उनकी विशेष आव भगत होती थी। अलवर में होली के स्वरूप में समय के साथ परिवर्तन आ रहा है। होली के रंगों में समय के साथ परिवर्तन आया है जिसका स्वरूप अब पहले से कम आत्मीयता पूर्ण हो गया है। अलवर के बुजुर्गों का कहना है कि अलवर में अब होली में रंगों से लोग डरने लगे हैं। इसमें प्यार की कमी है। जहां प्यार होता है, वहां रंग व गुलाल से डरा नहीं जाता बल्कि अपने मित्र का इंतजार किया जाता है।
Published on:
01 Mar 2018 12:00 pm
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