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भक्तों को भगवत दर्शन के लिए मंदिर जाने की जरुरत नहीं, जानिए क्या है वजह, पढे़ यह खबर

राज्य के चयनित मंदिरों में हुई सुविधा, अलवर के मथुराधीश मंदिर में लगाया सेटअप अलवर. देवस्थान विभाग के मंदिरों में विराजमान देव प्रतिमाओं के दर्शन भक्त घर बैठे कर सकेंगे। इसके साथ ही मंदिरों में होने वाली आरती का भी लाइव देख सकेंगे। इसके लिए विभाग की ओर से राज्य के चयनित मंदिरों में सेटअप लगवाया गया हैं।

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अलवर

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Jyoti Sharma

Mar 16, 2024

भक्तों को भगवत दर्शन के लिए मंदिर जाने की जरुरत नहीं, जानिए क्या है वजह, पढे़ यह खबर

भक्तों को भगवत दर्शन के लिए मंदिर जाने की जरुरत नहीं, जानिए क्या है वजह, पढे़ यह खबर

इसमें अलवर शहर में हजारी का मौहल्ला के मथुराधीश मंदिर में भक्तों को ऑनलाइन दर्शन की सुविधा मिलेगी। इसके लिए विभाग की ओर से मंदिर में सीसीटीवी कैमरे लगाकर इसका सेटअप तैयार किया है।

कोरोना में हुई थी शुरुआत, अब मिल रहा है लाभ

गौरतलब है कि राजस्थान सरकार की ओर से कोविड 19 के मध्येनजर प्रदेश के दो प्रमुख मंदिरों ऋषभदेव व गोगामेड़ी में श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन दर्शन की व्यवस्था की गई थी। क्योंकि कोरोना के दौरान भक्त मंदिर तक नहीं पहुंच पा रहे थे। इसके बाद वर्ष 2023 में राज्य के पांच अन्य प्रमुख मंदिरों में ऑनलाइन दर्शन शुरु किए गए। इसकी सफलता को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से 24 मंदिरों में ऑनलाइन दर्शन की व्यवस्था शुरू की है।

देश विदेश के भक्त कर सकेंगे दर्शन

इधर, मंदिरों के पुजारियों का कहना है कि निजी मंदिरों में प्रतिदिन आरती व श्रृंगार का भक्तों को ऑनलाइन दर्शन करवाया जा रहा है। इससे बुजूर्ग व बीमार भक्त घर बैठे ही भगवान के दर्शन कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर लिंक भी शेयर किया जाता है। देश विदेश के भक्त मंदिरों से जुड़ रहे हैं। इससे भक्तों की संख्या भी बढ़ी हैं। ऐसे में सरकारी मंदिरों में इस तरह के प्रयास सराहनीय है।

वेबसाइट हुई तैयार, यूटयूब पर भी होंगे दर्शनदेवस्थान विभाग के निरीक्षक सुमित कुमार ने बताया कि देवस्थान विभाग के चयनित मंदिरों में ऑनलाइन दर्शन की सुविधा शुरू की गई है। इसमें अलवर का एक मंदिर शामिल है इसमें मार्च के अंतिम सप्ताह तक ऑनलाइन दर्शन की सुविधा शुरू हो जाएगी। टेंडर होने के बाद कैमरे भी लग गए हैं। इसके लिए वेबसाइट तैयार की गई है और जल्द ही यूटयूब पर भी सुविधा मिल जाएगी।

फैक्ट फाइल

राज्य में राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार श्रेणी के मंदिर एवं संस्थान 390

राज्य में राजकीय आत्मनिर्भर श्रेणी के मंदिर एवं संस्थान 200

राज्य में राजकीय सुपुर्दगी श्रेणी के मंदिर 936