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यहां कुछ ही नेताओं के पास रही है विधायकी

अलवर. राजनीति में जिसका सिक्का एक बार चल गया, फिर राजनीतिक दल भी उस सिक्के का विकल्प नहीं तलाशते। हालांकि पार्टियां दावे जरूर करती हैं कि नए नेता विधानसभाओं में तैयार कर रही हैं ताकि भविष्य में वह किसी न किसी सांचें में फिट किए जा सकें। जिले की तीन विधानसभाएं ऐसी हैं जहां विधायकी कुछ ही परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती है। ये करीब तीन दशक से चला आ रहा है।

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अलवर

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susheel kumar

Sep 17, 2023

यहां कुछ ही नेताओं के पास रही है विधायकी

यहां कुछ ही नेताओं के पास रही है विधायकी

- कठूमर, रामगढ़ व मुंडावर विधानसभा का करीब तीन दशक से यही चल रहा है ट्रेंड

- राजनीतिक पंडित कहते, पार्टियों को नए चेहरे भी करने चाहिए तैयार

अलवर. राजनीति में जिसका सिक्का एक बार चल गया, फिर राजनीतिक दल भी उस सिक्के का विकल्प नहीं तलाशते। हालांकि पार्टियां दावे जरूर करती हैं कि नए नेता विधानसभाओं में तैयार कर रही हैं ताकि भविष्य में वह किसी न किसी सांचें में फिट किए जा सकें। जिले की तीन विधानसभाएं ऐसी हैं जहां विधायकी कुछ ही परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती है। ये करीब तीन दशक से चला आ रहा है। अब देखना है कि राजनीतिक दल इस बार नए चेहरे मैदान में उतारती हैं या फिर उन्हें चेहरों पर दांव लगाती हैं।

कठूमर विधानसभा
वर्ष 1993 में निर्दलीय मंगल राम कोली विधायक बने और भैरो सिंह शेखावत की सरकार में उप मंत्री का दर्जा मिला। इसके बाद वर्ष 1998 और वर्ष 2003 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के रमेश खींची को यहां से जीत मिली। इसके बाद वर्ष 2008 में भाजपा से बाबूलाल बैरवा यहां जीते और वर्ष 2013 में भाजपा के मंगल राम कोली को यहां जीत मिली। वर्ष 2018 में कांग्रेस पार्टी के टिकट से बाबूलाल बैरवा यहां से जीत कर विधानसभा पहुंचे।

रामगढ़ विधानसभा

क्षेत्र में वर्ष 1993 में कांग्रेस से जुबेर खान विधायक बने। वर्ष 1998 में यहां भाजपा के टिकट से ज्ञानदेव आहूजा को जीत मिली। वर्ष 2003 में यहां कांग्रेस पार्टी के टिकट से फिर जुबेर खान विधायक बने और वर्ष 2008 में भाजपा के टिकट से ज्ञानदेव आहूजा जीते। वर्ष 2013 में भी उन्हें जीत हासिल हुई। वर्ष 2018 में यहां जुबेर खान की पत्नी सफिया खान को टिकट मिला और वह विधायक बनी। यहां पिछले 30 साल से इन्हीं दो परिवारों में विधायकी चली आ रही है।

मुंडावर विधानसभा
वर्ष 2003 में भाजपा के टिकट से धर्मपाल चौधरी विधायक बने और वसुंधरा सरकार में संसदीय सचिव बने। वर्ष 2008 में यहां कांग्रेस पार्टी के मेजर ओपी यादव को जीत मिली। वर्ष 2013 में यहां भाजपा के धर्मपाल चौधरी जीतकर विधानसभा में पहुंचे। इसके कुछ दिन बाद पूर्व विधायक मेजर ओपी यादव का निधन हो गया और वर्ष 2017 में विधायक रहते हुए धर्मपाल चौधरी का भी निधन हो गया। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में उनके बेटे मनजीत चौधरी को भाजपा ने टिकट दिया और उनके बेटे को यहां जीत मिली। इस प्रकार यहां भी दशकों से विधायकी इसी परिवार में ही रही है।