
न गर परिषद अलवर का बजट तीन साल पहले की तुलना में करीब 15 करोड़ रुपए बढ़ गया है। वर्ष 2016 में 31 करोड़ रुपए वास्तविक खर्च राशि थी। अब 2018-19 का प्रस्तावित बजट 49 करोड़ रुपए पहुंच गया है। तीन सालों में जिस रफ्तार से बजट की राशि बढ़ रही है, उसके हिसाब से विकास कार्य पर काम नहीं हो रहा है। बजट में करोड़ों रुपए बढऩे के बाद भी शहर में बदहाली का आलम चहुंओर बना हुआ है। खास बात यह है कि बजट का आधा पैसा तो अधिकारी व कर्मचारियों की तनख्वाह, पेंशन व अन्य लाभों पर खर्च हो जाएगा। जनता के मतलब का बजट तो 7.41 करोड़ रुपए है। जिससे नए कार्य कराए जाएंगे। सफाई खर्च वाला परिचालन एवं संधारण का बजट 7 करोड़ से बढ़ाकर करीब 22 करोड़ कर दिया गया है। जिसमें सफाई के अलावा रोशनी एवं सम्पतियों का संधारण सहित कई खर्च शामिल हैं।
शहर में कचरा संग्रहण की डोर टू डोर व्यवस्था सही की है। लेकिन अभी इसका पूरा उपयोग नहीं हो रहा है। पूरे शहर से कचरा डोर टू डोर संग्रहण हो। तय समय पर नियमित रूप से कचरा उठाया जाए तो परिणाम आएंगे।
मुकेश विजय, व्यापारी
कृषि कॉलोनियों में बुरा हाल है। बजट में कृषि कॉलोनियों के विकास की बात जरूर होनी चाहिए। लेकिन नगर परिषद के स्तर पर कृषि कॉलोनियों की कतई सुध नहीं ली जाती है। जिसके कारण यहां अधिक खराब हाल हैं।
पप्पू खान, दुकानदार
चूड़ी मार्केट में जाओ या किसी दूसरे बाजार में। दुकानों के आगे चलने की जगह नहीं मिलती है। अतिक्रमण पर प्रशासन चुप क्यूं है। जगह-जगह कचरा पड़ा मिलता है। एेसी कोई व्यवस्था तय हो जिससे परिणाम सामने दिखें।
पूनम विजय, गृहणी
नगर परिषद का आमजन पर ध्यान नहीं है। तभी तो बजट के प्रभावी परिणाम सामने नहीं आ रहे हैं। कचरा पूरा नहीं उठता। सड़क व नालों की सुध न हीं ली जाती है। एेसे में स्मार्ट शहर की उम्मीद नहीं की जा सकी।
जितेन्द्र कुमार, व्यापारी
नगर परिषद का करोड़ों रुपए का बजट है। फिर भी सफाई नहीं है। सबसे पहले परिषद को सफाई पर फोकस करने की जरूरत है। तभी शहर की पहली तस्वीर साफ होगी। यहां सफल होने के बाद आगे बढऩे की जरूरत है।
राकेश खण्डेलवाल, बुजुुर्ग
Published on:
09 Feb 2018 05:35 pm
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