नारायणपुर (अलवर). ताल के पेड़ों की छाल उतार कर ले जाने से इन पेड़ों के सूखने की आशंका बनी हुई है। ताल यानि अर्जुन के पेड़ की विशेषता यह है कि दवाइयों के रूप में भी काम आता है। इस पेड़ की छाल को कूटकर इसके रस को हार्ट हृदय रोगी को पिलाने से उसे लाभ मिलता है। इसे लेकर वन विभाग ताल के पौधे लगवा रहा है।
हाल ही में एक ताल का पेड़ सडक़ पर गिर गया था। जिसकी छाल को रातोरात उतार कर ले गए। जिला मुख्यालय से 42 किलोमीटर दूर व उपखण्ड क्षेत्र से करीब 10 किमी दूर तालवृक्ष धाम स्थित है। पौराणिक एवं ऐतिहासिक दोनों ही रूपों में इस स्थान का विशेष महत्व रहा है। जन श्रुतियों के अनुसार तालवृक्ष मांडव ऋषि की तपों स्थली रहा है। इस स्थान पर ताल ( अर्जुन ) के वृक्ष बहुतायत में होने के कारण तालवृक्ष कहा जाता है। इस धाम के समीप स्थित गांव मुण्डावरा है। इसका नाम मांडव ऋषि के नाम पर ही पड़ा। यह स्थान महाभारत प्रसंग से भी जुड़ा है।
किवदंती है कि महाभारत काल में पाण्डवों ने अज्ञातवास के दौरान अपने हथियारों को तालवृक्ष में ताल के ऊंचे पेड़ों में छुपाए थे। जिसके कारण यह स्थान विख्यात है। इन पेड़ों की ऊंचाई अधिक होने के कारण ही इन पेड़ों का नाम ताल पड़ा। हालांकि इन ताल के पेड़ों का वास्तविक नाम अर्जुन । यह वृक्ष भारत में दो ही जगह मिलता है। मध्यप्रदेश में उज्जैन नगरी में महाराजा प्रद्योत के उद्यान में तथा दूसरी जगह तालवृक्ष अलवर राजस्थान में है। इधर वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ताल के पौधे तैयार कर इन्हें लगाकर कर लुप्त होने से बचाने में लगा हुआ है। जो पेड़ यहां लगे हुए है, वह बहुत लम्बे समय के उम्र दराज हो गए हैं। इसलिए इनको बचाना बहुत आवश्यक है।