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बेटियों को ऑफिस लाने के लिए अभिभावकों में दिख रहा उत्साह

राजस्थान पत्रिका के संस्थापक कर्पूर चन्द्र कुलिश की जयंती 20 मार्च को बिटिया एट वर्क के रूप में मनाने का हर तरफ स्वागत किया जा रहा है। इसमें ज्यादा से ज्यादा भागीदारी को लेकर अभिभावकों में उत्साह है।

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अलवर

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jitendra kumar

Mar 18, 2024

बेटियों को ऑफिस लाने के लिए अभिभावकों में दिख रहा उत्साह

बेटियों को ऑफिस लाने के लिए अभिभावकों में दिख रहा उत्साह

राजस्थान पत्रिका के संस्थापक कर्पूर चन्द्र कुलिश की जयंती 20 मार्च को बिटिया एट वर्क के रूप में मनाने का हर तरफ स्वागत किया जा रहा है। इसमें ज्यादा से ज्यादा भागीदारी को लेकर अभिभावकों में उत्साह है।

कार्य समझने का प्रयास

पत्रिका समूह के सामाजिक सरोकारों की श्रृंखला में बेटियां अपने माता-पिता के कार्य स्थलों पर जाकर उनकी सीट पर बैठकर उनके कार्यों को समझने का प्रयास करती हैं। इसका उद्देश्य बेटियों को आगे बढ़ाना है। अभिभावक इस पल के फोटो, वीडियो और अनुभव तय फॉर्मेट में पत्रिका के साथ शेयर करते हैं जिन्हें पत्रिका के प्रिंट से मल्टीमीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यथोचित स्थान दिया जाता है। अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहें पत्रिका।

बेटी में मेरे काम को जानने की ललकजिला अस्पताल अलवर के सीनियर फिजिशियन डॉ. सुरेश मीणा ने कहा कि एक पिता अपनी लाडली बेटी को जीवन के नए आयाम के बारे में रूबरू कराता है। इसमें समाज, परिवार और कार्य स्थल पर किस प्रकार से काम किया जाता है। मैं पेशे से डॉक्टर होने के नाते मेरी बेटी को भी ऑफिस में डॉक्टरी का कामों की जानने की जिद, बेटी को ऑफिस लाने के लिए मजबूर कर देती है। मेरी बेटी ने ऑफिस में डॉक्टरों की कार्यशैली के बारे में जाना और उत्साहित रही। डॉक्टर किसी प्रकार से मरीजों की जांच करते हैं और किन उपकारणों को उपयोग में लेते हैं आदि के में समझा।
बेटों से कम नहीं बेटियांहोटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन ेके अध्यक्ष पवन खंडेलवाल ने कहा कि बेटियां बेटों से किसी भी तरह से कम नहीं है, जब हम बेटों को अपने बिजनेस में आगे बढ़ाते हैं तो बेटियों को पीछे नहीं रखना चाहिए। बेटियां काम को लेकर बेटों से ज्यादा संजीदा होती है। बेटियां बेटों की तरह आगे बढे़गी तो देश भी चहूंओर तरक्की करेगा। मेरी बेटी एमबीए कर रही हैं। वह बिजनेस के क्षेत्र में जाना चाहती हैै। वह जो भी करती हैं सोच समझकर करती है।
अलवर के जीडी कॉलेज की सहायक आचार्य पिंकी ने कहा कि एक मां अपनी बेटी में अपना बीता हुआ कल देखती हैं और एक बेटी के लिए मां उसकी रोल मॉडल होती है। यही वजह उन दोनों के रिश्ते को खास बनाती है। ऐसा ही रिश्ता है मेरा और मेरी बेटी अनायशा का। जब मैं कॉलेज जाती हूं तो मेरे द्वारा किए गए कामों को ध्यानपूर्व देखती है और किस प्रकार से कॉलेज में काम किया जाता है, उसे सीखती है। अनायशा की चंचलता और मासूमियत भरी बातें सुनकर ऐसा लगता है कि यह पल कभी खत्म ना हो और उसकी अठखेलियां मेरे जीवन को हमेशा ऊर्जावान करती रहे।