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अलवर से एक कविता रोज: ‘कठिन काल है हमें संभलना होगा’, लेखिका आरती गुप्ता

कठिन काल है बहुत,पर हमें संभलना होगा।है मुश्किल पर,मिलकर हल करना होगा।।

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अलवर

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Lubhavan Joshi

Aug 31, 2020

Patrika Ek Kavita Roj Kathin kaal hai Humein Sambhalna Hoga

अलवर से एक कविता रोज: 'कठिन काल है हमें संभालना होगा', लेखिका आरती गुप्ता

कठिन काल है बहुत,पर हमें संभलना होगा।
है मुश्किल पर,मिलकर हल करना होगा।।
अगणित पुष्प हैं ,बिखर गए,
असमय ही वो ,चले गए,
फिर भी हमें ,न डरना होगा,
है मुश्किल पर,मिलकर हल करना होगा।
हाथों से है, काम छिना,
मन से है ,आराम छिना,
फिर भी हमें न रुकना होगा,
है मुश्किल पर,मिलकर हल करना होगा।
उलझन में मन पड़ा हुआ,
निराशा से है घिरा हुआ,
फिर भी दीपक -सा जलना होगा,
है मुश्किल पर, मिलकर हल करना होगा।
हार नहीं सकते हैं हम,
ठहर नहीं सकते हैं हम,
इस संकट को तो टलना होगा,
है मुश्किल पर, मिलकर हल करना होगा।

लेखिका का नाम: आरती गुप्ता

आरती गुप्ता दसवीं कक्षा से कविता लिख रही हैं, ये बाल भर्ती सीनियर सेकेंडरी आर्य नगर में हिंदी व संस्कृत की टीचर हैं आरती 150 से अधिक कविताएं व कहानियां लिख चुकी आरती गुप्ता मुख्य तौर पर देशभक्ति व नारीशक्ति पर लिखती हैं