शिवाजी पार्क की खारबास कच्ची बस्ती। गुरुवार दोपहर पत्रिका टीम इस बस्ती में पहुंची और एक युवक से पूछा- माल कहां मिलेगा? जवाब मिला- थोड़ा आगे जाओ, सड़क पर ही मिल जाएगा। टीम आगे पहुंची तो सड़क किनारे आठ-दस युवा बैठे मिले। कुछ देर में एक घर में से युवक निकलकर आया, जिसके हाथ में कपड़े का थैला था। उसके आते ही वहां बैठे कुछ युवक उसकी ओर बढ़े तथा बाइक सवार युवा भी उसके पास पहुंचे।
यह तस्कर थैले में पुड़िया निकाल युवाओं को बेचने लगा। पत्रिका रिपोर्टर भी तस्कर के पास पहुंचा तो तस्कर बोला- क्या चाहिए? रिपोर्टर ने कहा- माल चाहिए। तस्कर ने पूछा – कितना? रिपोर्टर बोला- एक पुड़िया। तस्कर ने तुरंत थैले में से एक पुड़िया निकाल हाथ में थमा दी और बोला- 100 रुपए दो। रिपोर्टर ने पूछा- कितना माल है? तस्कर बोला- 3 ग्राम की पुड़िया है। रिपोर्टर ने उसे 500 का नोट दिया।
तस्कर ने 100 रुपए काटकर 400 रुपए लौटा दिए। इसके बाद पत्रिका टीम गणेश गुवाड़ी इलाके में पहुंची। वहां किसी ने बताया कि एक युवक गांजा बेचता है। टीम वहां पहुंची और पूछताछ की तो दुकान पर बैठी महिला को शक हो गया। आस-पास के लोगों में खलबली मच गई। महिला व युवक ने कहा कि यहां कोई गांजा नहीं बेचता।
फोटो खींचते देख धमकाने आया तस्कर का साथी
शिवाजी पार्क की खारबास कच्ची बस्ती में पत्रिका टीम का एक रिपोर्टर तस्करों से माल खरीदने गया तथा दो साथी कुछ दूरी पर खड़े होकर तस्करों की वीडियो और फोटो बना रहे थे। इसी दौरान झुंड में बैठे एक तस्कर की नजर उन पर पड़ी तो वह उठकर उनकी तरफ आया और धमकाते हुए बोला कि फोटो क्यों खींच रहे हो? तभी फोटो जर्नलिस्ट ने कहा कि यहां पड़े कचरे की फोटो खींच रहे हैं तो युवक वहां से चला गया।
स्कूल-कॉलेज के युवाओं में जबरदस्त पैठ
अलवर में चरस और गांजे का अवैध कारोबार करने वाले सौदागरों की स्कूल-कॉलेज सहित शहर के युवाओं में जबरदस्त पैठ जमाई हुई है। हजारों की संख्या में युवा इनके नियमित ग्राहक हैं, जो इनसे चरस-गांजा खरीदते हैं। युवा गांजे को एक सफेद रंग के बटर पेपर में भर उसकी सिगरेट बनाकर पीते हैं। ये बटर पेपर शहर में पान की दुकानों पर खुलेआम बिक रहा है। वहीं, चरस और गांजे को लोग सिगरेट या चिलम में भरकर भी पीते हैं।
यहां बिक रहा नशे का सामान
अलवर शहर के चमेली बाग सामुदायिक भवन के पास, अखैपुरा, प्रतापबांध, लादिया, अशोका टॉकीज के समीप, फूटीखेल, शिवाजी पार्क, खारबास कच्ची बस्ती, गणेश गुवाड़ी, रूपबास, मूंगस्का, एनईबी, अग्रसेन चौराहा, बहरोड़ रोड व आरटीओ ऑफिस के पास तथा जिले के विजय मंदिर, डहरा, चिकानी, किशनगढ़बास, खैरथल, तिजारा, मुण्डावर, भिवाड़ी, बहरोड़, गोविंदगढ़, बड़ौदामेव व थानागाजी आदि इलाकों में चरस और गांजा खुलेआम बिक रहा है।
अलवर शहर में दो दर्जन से ज्यादा चरस-गांजा बेचने वाले सौदागर सक्रिय हैं। अलवर में हरियाणा के गुरुग्राम व झिरका फिरोजपुर, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश से तस्करी कर चरस-गांजा सप्लाई किया जा रहा है। इसके अलावा भरतपुर के नगर और नदबई से भी चरस-गांजा अलवर लाया जा रहा है। अलवर के तस्करों को चरस 50 से 60 हजार रुपए किलो तथा गांजा 35 से 36 हजार रुपए किलो के भाव पर मिल रहा है। ग्राहकों को चरस की 50 ग्राम की गोली ढाई-तीन हजार रुपए तथा गांजे की 3 ग्राम की पुड़िया 100 रुपए में बेच रहे हैं।
समाज के गुनहगार
चरस-गांजे के नशे का अवैध कारोबार अलवर में गहरी जड़ें जमा चुका है। स्कूल-कॉलेज के बच्चों से लेकर न जाने कितने ही युवा इस नशे की जद में आ चुके हैं। चरस-गांजे की धुएं का जहर सांसों में घुलकर युवा पीढ़ी को खोखला कर रहा है, लेकिन इस नशे के जाल को समेटने के लिए पुलिस सख्त कदम नहीं उठा रही।
पत्रिका टीम ने गुरुवार को शहर में ’स्टिंग ऑपरेशन’ के जरिए नशे के कारोबार की जड़ों को खोदा तो वे काफी गहरी नजर आई। जिलेभर में नशे के सौदागर जगह-जगह ’रक्तबीज’ की तरह बैठे हैं, जो पुलिस की शह पर खुलेआम चरस-गांजा बेच रहे हैं। उनके पास दिनभर नशे के आदी युवाओं की कतार लगी रहती है। ये तस्कर समाज के गुनहगार हैं। इनके खिलाफ पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। अभिभावकों को भी अपने बच्चों पर नजर रखनी चाहिए, ताकी उनके घर के चिराग गुमराह न हों।