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कीचड़ से सोना निकाल, कर रहे परिवार का पालन पोषण

अलवर के सर्राफा बाजार में सफाई के दौरान नालियों में गिरे सोने के कणों को निकालका कुछ लोग 20 से 30 हजार रुपए प्रतिमाह कमा रहे है।

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अलवर

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Hiren Joshi

Nov 18, 2017

man taking of mud for gold

आपने कई जगहों से सोना निकालने की बात सुनी होगी। लेकिन अलवर में कुछ लोग नालियों की कीचड़ से सोना निकालकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे है। ये लोग सफाई के दौरान शहर के सर्राफा बाजार में सुनारों की ओर से सोने-चांदी की कटाई व घिसाई के दौरान उनकी दुकानों के नीचे नालियों में गिरने वाले सोने के कणों को निकालकर प्रति माह 20 से 30 हजार रुपये कमा रहे है। नालियों से कचरा निकालने की इस कला को ये लोग च्नारियाज् कहते है। नारिया नाम की यह कला केवल गिने-चुने लोगों को ही आती है। प्रतिदिन 20 से 25 लोग सर्राफा बाजार में सुनारों की दुकानों के नीचे नालियों की कीचड़ को निकालते है, तथा इसे जमा कर अपने घर ले जाते है। इस कीचड़ कोपानी से 2-3 बार साफ कर इसमें से कचरा अलग किया जाता है। इस कचरे को तेजाब में डालते है, इसके बाद सारे सामान को भट्टी में डालकर इसमें से सोने-चांदी के कण अलग कर लिए जाते है।


40 वर्षों से चली आ रही यह नारिया कला


नारिया नामक यह कला करीब 40 वर्षों से चली आ रही है। इस कला को जानने वाले लोग अपने घर बच्चों को पढ़ी दर पीढ़ी यह कला सिखा रहे है। घर के एक सदस्य को यह काम बारीकी से सीखाया जाता है, तथा दूसरे सदस्य कचरे को निकालने आदि का काम करते है। यह लोग सोना निकालने के बाद वापस सुनार को बेचकर पैसे कमाते है।


अब समाप्त हो रही है यह कला


कई वर्षों से यह काम कर रहे सुरेश ने बताया कि 40 वर्षों से चली आ रही यह कला अब समाप्त हो रही है। आजकल युवा इस काम को करने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहे है। इसके साथ पहले के मुकाबले यह काम कम रह गया है। वहीं 1 माह पूर्व ही यह कला सीखने वाले अविनाश का कहना है कि उसे यह कार्य घर के बड़े सदस्यों ने सिखाया है तथा वह उसके परिवार की इस पुश्तैनी कला को आगे बढ़ाना चाहता है।