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सरकार बदलते ही 5 माह बाद फर्जी नियुक्तियों को लेकर जागी पुलिस

प्रदेश में निजात बदलते ही सरकारी मशीनरी की कार्यशैली भी बदल गई। अब 5 माह बाद फर्जी नियुक्तियों को लेकर पुलिस अफसर जागे हैं। उन्होंने जिला परिषद से रेकॉर्ड तलब किया है। इसके बाद परिषद में हड़कंप मच गया। बताते हैं कि कुछ पूर्व अफसर व कई लिपिक इसकी चपेट में आ सकते हैं। भर्ती शाखा पूरी तरह कटघरे में है। वह अपने बचाव के रास्ते ढूंढ रहे हैं।

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अलवर

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susheel kumar

Jan 11, 2024

सरकार बदलते ही 5 माह बाद फर्जी नियुक्तियों को लेकर जागी पुलिस

सरकार बदलते ही 5 माह बाद फर्जी नियुक्तियों को लेकर जागी पुलिस

- जिला परिषद ने पिछले वर्षों फर्जी शिक्षक, लिपिक आदि पकड़े गए, जयपुर एसओजी की जांच के बाद कराई गई थी चार लोगों पर रिपोर्ट
- इस फर्जी नियुक्ति में जिला परिषद के पूर्व अफसरों व लिपिकों का हाथ बताया जा रहा, जांच ठीक हुई तो कई जा सकते हैं जेल

प्रदेश में निजात बदलते ही सरकारी मशीनरी की कार्यशैली भी बदल गई। अब 5 माह बाद फर्जी नियुक्तियों को लेकर पुलिस अफसर जागे हैं। उन्होंने जिला परिषद से रेकॉर्ड तलब किया है। इसके बाद परिषद में हड़कंप मच गया। बताते हैं कि कुछ पूर्व अफसर व कई लिपिक इसकी चपेट में आ सकते हैं। भर्ती शाखा पूरी तरह कटघरे में है। वह अपने बचाव के रास्ते ढूंढ रहे हैं।

सरकार एक्शन में, पर पुलिस जांच को आगे नहीं बढ़ा रही

जिला परिषद की ओर से पिछले वर्षों में शिक्षकों व लिपिकों की भर्ती की गई थी। इन्हीं भर्तियों में खेल हुआ। इस मामले की शिकायत एसओजी जयपुर से हुई। इस प्रकरण को राजस्थान पत्रिका ने प्रमुखता से प्रकाशित किया तो एसओजी जयपुर की जिला परिषद में एंट्री हुई और जांच रिपोर्ट के आधार पर चार लोगों पर अलवर में पुलिस ने अगस्त 2023 में रिपोर्ट दर्ज की। अरावली विहार थाने में शिक्षक रुकमणी नंदन शर्मा, लिपिक कमल सिंह व दो अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। उम्मीद थी कि पुलिस इस केस में तत्परता दिखाएगी लेकिन 5 माह बाद पुलिस जागी है। प्रदेश सरकार वर्ष 2013 में पेपर लीक करने वाले व फर्जी भर्तियों को अंजाम देने वालों को गिरफ्तार कर रही है लेकिन यहां पुलिस की जांच में तेजी नहीं दिख रही। यहां परिषद के ही कुछ लोगों को पुलिस बचाने क तैयारी में है।


ये थी एसओजी की जांच रिपोर्ट
एसओजी जयपुर के जांच निरीक्षक सुरेश कुमार का कहना था कि जिला परिषद की इन नियुक्तियों में पूरा जांच दल कटघरे में है। इसमें शाखा लिपिक, नियुक्ति देने वाले अफसर, दस्तावेज सत्यापन दल, विधि से जुड़े लोगों की जांच विस्तृत होनी चाहिए। स्थानीय पुलिस विस्तृत रूप से इसकी जांच करेगी।

अधिकारी बदलें तो दौड़ सकती है जांच

इस प्रकरण की जांच खुद थाना प्रभारी अरावली विहार कर रहे हैं। कुछ लोगों का तर्क है कि थाना प्रभारी के पास कई काम होते हैं। ऐसे में जांच आदि समय पर नहीं हो पाती। समय का अभाव होता है। ऐसे में इस जांच को किसी अन्य अधिकारी से कराया जाए तो जल्द हो सकती है। क्योंकि जिस तरह सरकार फर्जी मामलों में गिरफ्तारियां करवा रही है। उसी तरह इस मामले में भी जांच अधिकारी बदलने से तेजी आ सकती है।


ये थे मामले
- शिक्षक भर्ती की पात्र अभ्यर्थी योगेंद्री यादव को नौकरी नहीं देकर अपात्र व्यक्ति और कम नंबर वाले अभ्यर्थी को नौकरी दिया जाना।

- कनिष्ठ लिपिक भर्ती में अपात्र अभ्यर्थी रुकमणी नंदन शर्मा की ओर से खुद की उम्र की सही सूचना दिए जाने के बाद ओवरऐज होने पर भी एलडीसी पद पर नियुक्ति दिया जाना।
- अपात्र अभ्यर्थी प्रमिला देवी को हाईकोर्ट में जिला परिषद की ओर से अपात्र होने की सूचना देने के बाद एलडीसी पद पर नौकरी दिया जाना।

- अपात्र शिक्षक अभ्यर्थी कमल सिंह को आवेदन के एक साल बाद की डिग्री लगाए जाने पर भी शिक्षक पद पर नौकरी दिया जाना।

एसओजी की रिपोर्ट के आधार पर संबंधित लोगों पर केस दर्ज कर लिया गया था। अब जिला परिषद से रेकॉर्ड मांगा गया है। उसके आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगे। तेजी से जांच होगी।
- पवन चौबे, थाना प्रभारी, अरावली विहार