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बाजरा व गेहूं के भाव हुए बराबर, क्या बोले विशेषज्ञ, देखें वीडियो…

केन्द्र सरकार के प्रोत्साहन से बाजरे की खेती के प्रति किसानों का रुझान बढ़ा है। सरकार की ओर से साल 2014 में पहले कार्यकाल की शुरुआत में ही बाजरे के समर्थन मूल्य में 300 प्रतिशत की वृद्धि की गई। इसके कारण वर्तमान में गेहूं और बाजरे के भाव लगभग बराबरी पर पहुंच गए हैं। इससे पिछले कुछ वर्षों से बाजरे की खेती की ओर से किसान आकर्षित हुए हैं।

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केन्द्र सरकार के प्रोत्साहन से बाजरे की खेती के प्रति किसानों का रुझान बढ़ा है। सरकार की ओर से साल 2014 में पहले कार्यकाल की शुरुआत में ही बाजरे के समर्थन मूल्य में 300 प्रतिशत की वृद्धि की गई। इसके कारण वर्तमान में गेहूं और बाजरे के भाव लगभग बराबरी पर पहुंच गए हैं। इससे पिछले कुछ वर्षों से बाजरे की खेती की ओर से किसान आकर्षित हुए हैं। फिलहाल अलवर की कृषि उपज मंडी में सोमवार को अच्छी क्वालिटी के बाजरे के भाव करीब 2600 रुपए और गेहूं के भाव भी करीब 2600 रुपए प्रति क्विंटल रहे।

पिछले कुछ वर्षों में बाजरे की आवक भी बढ़ी:
अलवर शहर की कृषि उपज मंडी में साल 2022 में अप्रेल से अक्टूबर तक 1 लाख 97 हजार 241 क्विंटल बाजरे की आवक हुई। जबकि इस साल अप्रेल से अक्टूबर तक 2 लाख 13 हजार 983 क्विंटल बाजरे की आवक हुई है। इसी तरह साल 2022 में बाजरे का समर्थन मूल्य 2350 रुपए प्रति क्विंटल था। जो अब 2500 रुपए प्रति क्विंटल है।

अलवर के बाजरे की कई राज्यों में मांग:
अलवर जिले के बहरोड़, बानसूर, खैरथल, थानागाजी, बड़ौदा व रामगढ़ सहित समस्त ग्रामीण क्षेत्रों में बाजरे की खूब पैदावार होती है। वहीं, मुख्य रूप से अलवर के बाजरे की हरियाणा, पंजाब और गुजरात में अच्छी मांग है। इसमें हरियाणा व पंजाब में मुर्गी पालन उद्योग से जुड़े लोग अत्यधिक मात्रा में बाजरे की खरीद कर रहे हैं। इसके साथ अच्छी क्वालिटी के बाजरे की गुजरात में मांग लगातार बढ़ रही है।

किसानों के लिए खेती भी बन रही लाभ का सौदा:
सरकार की ओर से बाजरे को पौष्टिक व मोटे अनाज के रूप में प्रचारित करने से बाजरे का उपयोग बढ़ रहा है। जबकि करीब एक दशक से पहले तक बाजरे को गरीब का भोजन माना जाता रहा है। वहीं, पिछले कुछ वर्षों से हर वर्ग में बाजरे का उपयोग बढ़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार बाजरे की खेती में लागत भी कम आती है और प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान की संभावना भी कम रहती है। इसके अलावा बाजरे की कड़बी भी पशुओं के लिए पौष्टिक आहार के रूप में काम में आती है।

सरकार कर रही प्रोत्साहित:
सरकार की ओर से बाजरे के समर्थन मूल्य में वृद्धि कर ऐतिहासिक कदम उठाया गया। सरकारी प्रोत्साहन से पिछले कुछ वर्षों से बाजरे के खेती व उपयोग के प्रति किसानों में रुझान बढ़ा है।
सुरेश जलालपुरिया, अध्यक्ष, कृषि उपज मंडी अलवर।

बाजरे का उपयोग बढ़ा:
कृषि उपज मंडी में 2022 में अप्रेल से अक्टूबर तक 1 लाख 97 हजार 241 क्विंटल बाजरे की आवक हुई। जबकि इस साल अप्रेल से अक्टूबर तक 2 लाख 13 हजार 983 क्विंटल बाजरे की आवक हुई है। पिछले कुछ वर्षों से बाजरे का उपयोग बढ़ा है।
ईशाक हारुन, उप निदेशक, कृषि विपणन विभाग, खंड अलवर।