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सिंचाई से लहलहाने लगी रबी की फसल…देखे वीडियो

अलवर जिले के अकबरपुर क्षेत्र में मावठ के बाद सर्दी बढऩे से रबी की फसल में जान आ गई है। बारिश से पहले जहां फसलें ङ्क्षसचाई के अभाव में कमजोर नजर आ रही थी, लेकिन मावठ होने अब खेतों में लहलहाने लगी है। इस समय हुई बरसात से रबी की फसलों के लिए अमृत का काम किया है। किसानों के चेहरे खिल गए। चने और सरसों की फसल में वृद्धि हो रही है।

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अलवर जिले के अकबरपुर क्षेत्र में मावठ के बाद सर्दी बढऩे से रबी की फसल में जान आ गई है। बारिश से पहले जहां फसलें ङ्क्षसचाई के अभाव में कमजोर नजर आ रही थी, लेकिन मावठ होने अब खेतों में लहलहाने लगी है। इस समय हुई बरसात से रबी की फसलों के लिए अमृत का काम किया है। किसानों के चेहरे खिल गए। चने और सरसों की फसल में वृद्धि हो रही है।

किसानों ने बताया कि जिन किसानों के पास ङ्क्षसचाई के साधन नहीं थे, उन्हें मावठ से फायदा मिला है। अब तापमान में गिरावट आने से फसलों में फायदा मिलेगा। किसान रमेश पटेल आदि का कहना है कि इस समय रबी की फसल में चना, सरसों, गेहूं, जौ व गेहूं की बुवाई हो चुकी है। जिन किसानों ने देरी से गेहूं की बुवाई की, वे भी खुश है। कृषि अधिकारियों के अनुसार चना व सरसों की बात करें तो प्रथम ङ्क्षसचाई बुवाई के करीब 35 से 40 दिन बाद कर देनी चाहिए। ङ्क्षसचाई के साथ उपयुक्त मात्रा में नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए यूरिया का छिडक़ाव कर देना चाहिए।


ऐसे ही चने में भी खरपतवार नियंत्रण करना चाहिए। चने की फसल में खरपतवार से उत्पादन प्रभावित होता है। करीब 15 से 50 दिन की बुवाई के बाद ङ्क्षसचाई कर देनी चाहिए। अगर इस दौरान बरसात हो जाए तो चने में ङ्क्षसचाई की विशेष आवश्यकता नहीं रहती। अगर गेहूं की बात करें तो ङ्क्षसचाई का समय चल रहा है। गेहूं में प्रथम ङ्क्षसचाई 25 से 30 दिन में कर दें। ऐसे में पौध की ग्रोथ अच्छी होती है। गेहूं की ङ्क्षसचाई के बाद खरपतवार की जानी चाहिए।