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पनीर असली है या नकली, पता कराने के लिए सरकार को देने पड़ते हैं 1 हजार रुपए, मिलावट करने वाले बेफिक्र, फैल रहा नकली व्यापार

Adulterated Paneer की जांच कराने के लिए एक हजार रुपए शुल्क देना पड़ रहा है, वहीं जो मिलावट कर रहे हैं वे बिल्कुल बेफिक्र है।

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अलवर

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Lubhavan Joshi

Feb 13, 2020

Rajasthan Adulterated Paneer inspection Cost One Thousand Rupees

पनीर असली है या नकली, पता कराने के लिए सरकार को देने पड़ते हैं 1 हजार रुपए, मिलावट करने वाले बेफिक्र, फैल रहा नकली व्यापार

अलवर. मुनाफा कमाने की होड़ लगी है। अब मिलावटी पनीर बहुतायत में बिकने लगा है। हालात ये हैं कि लोग पनीर खाने से डरने लगे है। लेकिन, इस मिलावट को रोकने के लिए सरकार के स्तर के प्रयास तो नहीं के बराबर है बल्कि निजी स्तर पर कोई मिलावट को पकडऩा चाहे तो भी बड़ा मुश्किल है।

जिले में खाद्य विभाग के जरिए पनीर का सैम्पल जांच कराने का एक हजार रुपए प्रति सैम्पल शुल्क लगता है। खाद्य विभाग की टीम के भरोसे रहें तो कभी सैम्पल की जांच नहीं होगी। विभाग के पास केवल दो निरीक्षक हैं। उनकी टीम अपने स्तर पर ही सैम्पल लेकर जांच करती है। निजी सैम्पल की जांच तभी हो सकती है जब प्रति सैम्पल एक हजार रुपए शुल्क दिया जाए। आम आदमी के जरिए एक हजार रुपए खर्च करके पनीर की जांच कराना संभव भी नहीं है। इसलिए न विभाग मिलावटी पनीर तक पहुंचता न जनता अपने बूते जांच करा पाती है। नतीजा मिलावटी मौज में है। अब तो पनीर बनाने की फैक्ट्रिंया लगने लगी हैं। जिनकी शुद्धता जांचने कोई पहुंचता ही नहीं है। न अलवर जिले में कोई ऐसी व्यवस्था है जहां आमजन अपने स्तर पर जांच करा सकें।

विभाग की जांच हो तभी कार्रवाई

निजी स्तर पर किसी ने पनीर या अन्य खाद्य पदार्थ की जांच करा ली और सैम्पल मिलावटी मिला तो भी विभाग के स्तर पर कार्रवाई नहीं हो सकती। उससे केवल यही पता चलेगा कि सम्बंधित खाद्य पदार्थ मिलावटी है। कार्रवाई के लिए जरूरी है कि विभाग अपने स्तर पर खाद्य पदार्थ का नूमला ले।

सरस में दूध की नि:शुल्क जांच

सरस डेयरी की ओर से दूध की नि:शुल्क जांच की जाती है। कोई भी व्यक्ति भवानी तोप स्थित सरस डेयरी पर पहुंचकर सैम्पल की जांच करा सकता है। लेकिन, जिले में पनीर की जांच कहीं नहीं होती है। केवल खाद्य विभाग की टीम के जरिए ही जांच संभव है।

नि:शुल्क जांच नहीं

विभाग के जरिए पनीर की जांच करा सकते हैं लेकिन, एक हजार रुपए शुल्क निर्धारित है। वैसे भी निजी स्तर पर कोई सैम्पल लेकर आता है तो उसकी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई नहीं हो सकती।
डॉ. ओपी मीणा, सीएमएचओ, अलवर