
महेंद्रसिंह शेखावत/अलवर. Rajasthan Assembly Election 2023: लक्ष्मणगढ़ होते हुए जब कठूमर पहुंचा तब तक दोपहर के दो बजे चुके थे। तेज धूप और गर्मी के कारण कठूमर के छोटे से बाजार में सन्नाटा पसरा था। एक दुकान में दो जनों का खाली बैठा देख मैं उनकी तरफ बढ़ा। उस वक्त बिजली गुल थी। जैसे ही गर्मी बढ़ी है, यहां बिजली की अघोषित कटौती की जाने लगी है। कठूमर विधानसभा क्षेत्र भरतपुर लोकसभा क्षेत्र में पड़ता है। यहां भी काफी घोषणाएं हुई हैं, लेकिन यहां का लोगों का सबसे बड़ा दर्द खारा पानी है।
जल जीवन मिशन योजना के तहत खेड़ली पर टंकी निर्माणाधीन है। इसी बात पर चर्चा चली तो रेटा गांव के रहने वाले दुकानदार राजू चौधरी कहने लगे भरतपुर के नगर क्षेत्र में चंबल का पानी आ चुका है तो कठूमर में क्यों नहीं? जल जीवन मिशन योजना के तहत गांव-गांव में करोड़ों रुपए खर्च हो रहे हैं। इतने बजट में तो यहां नहर ही आ जाती। तीन दशक से चंबल के पानी की बात सुन रहे हैं, कभी ईसरदा बांध से पानी की घोषणा होती है, लेकिन समाधान नहीं हो रहा है। गांवों में लोग टैंकरों से पानी खरीद कर पी रहे हैं। कठूमर क्षेत्र के करीब सौ गांवों में खारा पानी है। लखन दूधेरी कहते हैं हमारे हालात पश्चिमी राजस्थान से भी बदतर हो चुके हैं। जिला मुख्यालय दूर पड़ता है, अगर यहां आरटीओ आफिस की शाखा खुल जाए तो राहत मिलेगी।
रामगढ़ : एक्सप्रेस हाईवे से बढ़े जमीनों के भाव
कठूमर से गोविंदगढ़ होते हुए मैं रामगढ़ की ओर रवाना हुआ। रास्ते में मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेस हाईवे के नीचे से गुजरा। यहां एक कट भी है, जिससे रामगढ़ के लोगों का जयपुर जाना सुगम हो गया है। वो अब बजाय सरिस्का होकर जाने के दौसा तक इसी हाईवे से निकलते हैं। हाइवे बनने से आस-पास जमीनों के भाव भी बढ़े हैं। कस्बे के शिक्षाविद अजीत जैन तथा एडवोकेट दिनेश शर्मा (बंटी) क्षेत्र में अवैध खनन से चिंतित है। कहने लगे यहां पहाड़ साफ हो गए हैं। शहर में पेयजल एवं बिजली कटौती से लोग परेशान है। मेवात क्षेत्र से गो-तस्करी पर अंकुश नहीं लगा है। ऑनलाइन ठगी व टटलूबाजी का काम भी यहां ज्यादा हैं। सरकारी घोषणाओं के क्रियान्वयन का इंतजार है। यहां भी लोग चंबल के पानी की मांग करते हैं।
तिजारा : काम तो हुए पर जिला नहीं बना
रामगढ़ से चिकानी होते हुए मैं तिजारा पहुंचा तब तक शाम हो चुकी थी। यहां के प्रसिद्ध जैन मंदिर के आस-पास श्रद्धालुओं की आवाजाही लगी थी। यहां चर्चा चली तो बताया गया कि तिजारा विधानसभा क्षेत्र में काम तो काफी हुए हैं लेकिन जिला बन जाता तो सोने पर सुहागा हो जाता है। जिला न बनने से यहां के लोग निराश तो हुए, लेकिन प्रदेश के अन्य हिस्सों की तरह यहां विरोध प्रदर्शन जैसा कुछ नहीं हुआ। दुकानदार सुपार्श जैन तथा मुकेशकुमार जैन का दर्द एक सा ही नजर आया। कहने लगा तिजारा तो विश्व भर में प्रसिद्ध है। यहां जिला बनाते तो निसंदेह यहां सुविधाओं का विस्तार होता है। इसका लाभ तिजारा एवं यहां आने वाले श्रद्धालुओं को मिलता। सरकार को कम से कम तिजारा को रेल सेवा से तो जोडऩा चाहिए।
Published on:
24 May 2023 07:58 am
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