
क्षतिग्रस्त पानी की टंकी (फोटो - पत्रिका)
राजस्थान के अलवर जिले के गोविंदगढ़ में जलदाय विभाग की अनदेखी और एक लापरवाह ठेकेदार के कारण हादसा होते-होते टल गया। मामला एक पुरानी और जर्जर पानी की टंकी को गिराने से जुड़ा है। इस कार्य के लिए विभाग ने ढाई लाख रुपए का टेंडर जारी किया था, लेकिन ठेकेदार ने सुरक्षा इंतजामों के बजाय 'शॉर्टकट' अपनाकर मौत का खेल शुरू कर दिया।
हैरानी की बात यह है कि जलदाय विभाग के सहायक अभियंता (AEN) और कनिष्ठ अभियंता (JEN) ने पहले ही इस काम को लेकर ठेकेदार को सख्त निर्देश दिए थे कि बिना उचित सुरक्षा के काम शुरू न किया जाए। बावजूद इसके ठेकेदार ने नियमों को ताक पर रखकर रातों-रात टंकी के पिलरों को नीचे से तोड़ना शुरू कर दिया। ठेकेदार की मंशा शायद इसे असुरक्षित तरीके से ढहाने की थी, ताकि खर्चा बचाया जा सके।
जैसे ही मोहल्ले के लोगों को पानी की टंकी के पिलर तोड़ने की भनक लगी और पता चला कि बिना किसी सुरक्षा घेरे के इतनी विशाल टंकी को गिराया जा रहा है, वहां हड़कंप मच गया। ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि टंकी के बिल्कुल पास रिहायशी मकान बने हुए हैं। यदि टंकी किसी घर पर गिरती, तो कई परिवारों का नामोनिशान मिट सकता था।
बढ़ते विरोध को देख स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर काम को रुकवाया। सूचना मिलने पर जलदाय विभाग के सहायक अभियंता जैकी शर्मा भी पहुंचे। उन्होंने ठेकेदार को कड़ी फटकार लगाते हुए सवाल किया कि जब विभाग ने नोटिस जारी कर काम पर रोक लगा रखी थी, तो आखिर किसके आदेश पर पिलर तोड़े गए?
यह मामला प्रशासनिक मिलीभगत और ठेकेदारों की मनमानी का जीता-जागता उदाहरण है। सवाल यह उठता है कि क्या विभाग सिर्फ टेंडर जारी करने तक ही सीमित है? आबादी के बीच ऐसी संवेदनशील संरचनाओं को गिराने के लिए विशेषज्ञ टीम क्यों नहीं बुलाई गई? फिलहाल पुलिस और विभाग ने काम रोक दिया है, लेकिन ग्रामीणों में अब भी दहशत का माहौल है। अब देखना यह होगा कि क्या इस लापरवाही पर करवाई होगी या फिर कागजी कार्रवाई कर मामले को दबा दिया जाएगा।
Published on:
09 Apr 2026 02:42 pm
बड़ी खबरें
View Allअलवर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
