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Alwar: सरकार का पट्टा पोर्टल बना आमजन के लिए सिरदर्द, एक ही फाइल आयुक्त के पास 6 बार जा रही

हर व्यक्ति का यही सपना होता है उसे अपने घर का कानूनी हक मिले। इसके लिए वह पट्टा लेना चाहता है। सरकारें भी अभियान चलाकर ज्यादा से ज्यादा लोगों को पट्टा देना चाहती है, लेकिन राजस्थान सरकार का पट्टा पोर्टल ही लोगों के लिए सिरदर्द बन गया है।
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अलवर

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Umesh Sharma

Jul 15, 2026

patta portal

फाइल फोटो

राजस्थान सरकार पोर्टल से लेकर ऑनलाइन प्रक्रिया इसलिए शुरू करती है कि जनता के काम आसानी से हो सकें, लेकिन पट्टा पोर्टल ही जनता के लिए सिरदर्द बना हुआ है। एक ही फाइल 6 बार नगर निगम आयुक्त के पास जाती है। उनके पास कई जिम्मेदारियां हैं। ऐसे में इन फाइलों को संबंधित लोगों तक पहुंचने में समय लगता है। यह सिस्टम इसलिए विकसित किया गया थ कि जनता को बार-बार नगर निगम नहीं आना पड़े। लेकिन फाइल अटकने की वजह से अफसरों को याद दिलाना पड़ता है कि उनकी फाइलें संबंधित सीट को भेज दें। इसी कारण नगर निगम में पट्टा जारी करने की प्रक्रिया पेचीदा हो गई है।

पट्टे के लिए आवेदन की प्रक्रिया

ई-मित्र के जरिए या फिर लीज डीड की एसएसओ आइडी पर संबंधित व्यक्ति को आधार कार्ड, लैंड चेन, वोटर आइडी, आवंटन पत्र, बिजली बिल या पानी का बिल, हाउस टैक्स की रसीदें, भूखंड का नक्शा, दो गवाहों के आधार कार्ड व मोबाइल नंबर आदि दस्तावेज लगाने होते हैं। इसके बाद फाइल आगे के लिए प्रोसेसे होती है। इस दौरान कोई दस्तावेज की कमी होती है तो उसकी पूर्ति भी कराई जाती है।

इसलिए काम हुआ पेचीदा

जैसे ही पट्टे की फाइल पोर्टल पर अपलोड होती है, तो यह नगर निगम आयुक्त के पास पहुंचती है। वह फाइल को संबंधित लिपिक को दस्तावेज चेक करने के लिए भेजते हैं। लिपिक जैसे ही फाइल को ओके करते हैं, तो फिर से फाइल आयुक्त के पास आती और वह इस फाइल को फिर जेईएन को मौका रिपोर्ट के लिए भेजते हैं। उनकी रिपोर्ट होने के बाद फिर फाइल कमिश्नर के पास आती है और यहां से तहसीलदार के पास जाती है, जहां से पटवारी रिपोर्ट के लिए इसे भेजा जाता है। वहां से पूर्ति होने के बाद फिर फाइल आयुक्त के पास आएगी और फिर वह जोनल व साइट प्लान के लिए एटीपी के पास भेजते हैं। एटीपी कार्य करके फाइल आयुक्त की आइडी पर भेजते हैं और फिर आयुक्त लेखा विभाग में फाइल शुल्क के लिए भेजते हैं। शुल्क जमा होने के बाद आयुक्त पट्टा प्रकाशन के आदेश देते हैं। ऐसे में बार-बार फाइल आयुक्त के पास आई। आयुक्त के पास यदि काम अधिक है, तो जनता को जाकर उन्हें बार-बार बताना पड़ता है।