
नाइजीरियन ठगों पर भारी पड़ी राजस्थान पुलिस की होशियारी, जिस सोशल मीडिया से ठगी करते थे नाइजीरियन, उसी के जरिए पकड़े गए
अलवर. यदि पुलिस चाहे तो अपराधी को पाताल से भी ढूंढ़ निकालती है। पूर्व प्राचार्य से 71 लाख रुपए की ठगी मामले में अलवर पुलिस ने ये साबित कर दिखाया है। नाइजीरियन ठगों ने कुछ भारतीयों के साथ मिलकर बड़ी ही शातिरी से 15 दिन तक ऑनलाइन ठगी का जाल बुना। जिसे पुलिस ने बड़ी होशियारी से मात्र 12 दिन में ही उधेड़ ठगों को दबोच लिया।
नाइजीनियन और भारतीय ठगों ने 25 जुलाई को अलवर के स्कीम-8 निवासी पूर्व प्राचार्य सत्यव्रत शर्मा को अपनी ठगी के जाल में फंसाना शुरू किया और कुछ ही दिन में 71 लाख रुपए ठग लिए। पूर्व प्राचार्य ने इसकी रिपोर्ट 9 अगस्त को अरावली विहार थाने में दर्ज कराई। इसके बाद ठगों के जाल को उधेडऩा शुरू किया।
साइक्लोन सैल ने ठगों के फेसबुक अकाउंट, मोबाइल नम्बर और बैंक खातों का डेटा निकालकर खंगालना शुरू किया। इसके बाद सीआईयू और अरावली विहार थाने की टीम ने बैंक खातों और सीसीटीवी फुटेज देखे। इसके बाद पुलिस टीम एक-एक कदम आगे बढ़ते हुए ठगी में शामिल मोबाइल सेवा सर्विस प्रदाता कम्पनी के कर्मचारी, बैंक खाताधारक और नाइजीरियनों तक पहुंची और 12 दिन की कड़ी मेहनत के बाद 22 अगस्त को पुलिस ने वारदात का खुलासा कर दिया।
एक पासपोर्ट नहीं
अलवर पुलिस अधीक्षक परिस देशमुख ने बताया कि ठगी के मामले में गिरफ्तार नाइजीरियन लकी के पास पासपोर्ट नहीं मिला है। पूछताछ में उसने बताया कि उसका पासपोर्ट खो गया है। इसके बारे में एम्बेसी को लिखा गया है।
पांच जेसी, तीन रिमांड पर
अरावली विहार थानाधिकारी हरिसिंह ने बताया कि ठगी के सभी 8 आरोपियों को शुक्रवार को अवकाशकालीन मजिस्ट्रेट नीमराणा के समक्ष पेश किया। जहां से राधामोनी उर्फ वसुंधरा, मोहित कुशवाहा, अनूप पांडे, योगेन्द्र कुमार को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। जबकि मोहित टोकस उर्फ करण राणा, नाइजीरियन एचोनम जैम्स डेस्टीनी और लकी को पुलिस रिमांड पर सौंपा गया है।
Published on:
24 Aug 2019 10:42 am
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