
जितेंद्र चौधरी
किसानों ने परंपरागत खेती को छोड़कर नवाचार करते हुए आधुनिक खेती की तरफ कदम बढ़ाए हैं। अलवर का तापमान फसलों के अनुकूल होने से जिले के 11 किसानों ने 22 हजार स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए हैं। स्ट्रॉबेरी की खेती केवल पांच महीने नंवबर से मार्च तक होती है। किसानों को इससे अच्छा मुनाफा होने की उम्मीद है। अलवर के प्रतापगढ़, किशनगढ़बास, लक्ष्मणगढ़ और रामगढ़ के किसानों ने खेती में पहली बार नवाचार करते हुए स्ट्रॉबेरी की फसल उगाई है। इस फसल के लिए 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान नहीं होना चाहिए, जो मार्च तक इसके अनुकूल रहता है। हालांकि यह फसल खासतौर पर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, बिहार और अन्य राज्यों में पैदा की जा रही है।
स्ट्रॉबेरी पौधों को पॉली हाउस की तर्ज पर कवर किया जाता है। इससे दिन और रात का तापमान पौधों के लिए अनुकूल रहता है।
जिले में पानी की बढ़ती समस्या को लेकर किसानों का आधुनिक खेती के तरफ रूझान बढ़ा है। सब्जी और उद्यान वाली फसलों में पानी की कम खपत होती है और पैदावार अच्छी मिलती है। इसी कारण स्ट्रॉबेरी किसान कम पानी और कम जमीन में अच्छा मुनाफा लेने में जुटे हुए हैं। किसानों ने स्ट्रॉबेरी की विंटर डाउन किस्म लगाई है। किशनगढ़बास के किसान जितेन्द्र यादव ने बताया कि फसल पकी चुकी है और एक किलो के 400 रुपए मिल रहे हैं। सामान्य फसल की बजाय अच्छी रकम मिली है।
हमने 10 बिस्वा में 2000 से ज्यादा स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए हैं। इसमें करीब 20 हजार रुपए की लागत आई है। फसल आने वाले दिनों में फसल पक जाएगी और बाजार में बेची जाएगी। वर्तमान में एक किलो स्ट्रॉबेरी के 400 रुपए मिल रहे हैं।
हरि सिंह सांखला, किशनगढ़बास।
स्ट्रॉबेरी के एक बीघा में पौधे लगाए हैं, जिसमें जल्द फसल पकने वाली है। इसके साथ अन्य नकदी फसलों को लगाया है। इसमें पानी की खपत भी नाममात्र की होती है। इसमें सिंचाई बूंद-बूंद पद्धति से हो रही है।
श्याम शर्मा, किशोरी गांव, थानागाजी
इब्दिता के राजेश अग्रवाल ने बताया कि स्ट्रॉबेरी के 11 किसानों ने दो-दो हजार पौधे लगाए हैं। एक पौधे से करीब एक किलो से ज्यादा फल प्राप्त होते हैं। एक बीघा में एक टन तक की पैदावार हो सकती है। इसमें किसानों को लागत भी लगानी पड़ती है।
अलवर में स्ट्रॉबेरी की खेती में किसानों ने नवाचार किया है। इसके लिए कृषि वैज्ञानिकों से ट्रायल लिया जाएगा। उसके बाद इस खेती के लिए रिकमेंडेशन की जा सकती है। यह किसानों की अच्छी पहल है।
पीसी मीणा, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग, अलवर
Updated on:
03 Feb 2025 10:46 am
Published on:
03 Feb 2025 10:41 am

बड़ी खबरें
View Allअलवर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
