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Weather News: दिन में 36 डिग्री की तपिश और रात में कहर बनकर बरसे ओले, फसलें तबाह, राजस्थान के इस शहर में कुदरत का अजब खेल

Alwar Hailstorm News: देर रात हुई भारी ओलावृष्टि ने न केवल जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया, बल्कि किसानों की उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है।
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अलवर

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Jayant Sharma

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Updated: 15 Mar 2026, 8:21 AM IST

अलवर के मौसम को दिखाती एआई की मदद से तैयार तस्वीर

अलवर के मौसम को दिखाती एआई की मदद से तैयार तस्वीर

Rajasthan Weather Update: राजस्थान में कुदरत का एक ऐसा अनोखा और डरावना चेहरा देखने को मिला है जिसने सबको हैरान कर दिया है। रविवार का दिन जहां झुलसाने वाली गर्मी और पसीने से तरबतर करने वाली उमस के नाम रहा, वहीं सूरज ढलते ही फिजां ऐसी बदली कि आसमान से 'सफेद आफत' बरसने लगी। अलवर जिले के टपूकड़ा क्षेत्र में देर रात हुई भारी ओलावृष्टि ने न केवल जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया, बल्कि किसानों की उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है।

दिन में पसीना, रात में ओले

रविवार को राजस्थान के कई हिस्सों में पारा 36 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया था। लोग पंखे और कूलर की छांव में भी पसीने से बेहाल नजर आ रहे थे। दोपहर तक किसी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि मौसम चंद घंटों में 180 डिग्री तक घूम जाएगा। शाम होते ही बादलों की तेज गड़गड़ाहट और बिजली की चमक ने खतरे का संकेत दिया। देखते ही देखते तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हुई और फिर टपूकड़ा सहित आसपास के इलाकों में बेर के आकार के ओले गिरने लगे।

फसलों पर कुदरत की मार

इस बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि ने सबसे गहरा जख्म किसानों को दिया है। खेतों में खड़ी फसलें, जो कटाई के कगार पर थीं या पकने की ओर थीं, ओलों की मार से बिछ गई हैं। टपूकड़ा के किसानों का कहना है कि बेर के आकार के ओलों ने गेहूं और सरसों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। रात भर बिजली की कड़क और बादलों के शोर के बीच किसान अपनी आंखों के सामने अपनी मेहनत को बर्बाद होते देखते रहे।

मौसम विभाग की चेतावनी (Nowcast Warning)

मौसम केंद्र जयपुर द्वारा जारी ताजा बुलेटिन (Nowcast Warning-03) के अनुसार, आगामी कुछ घंटों तक प्रदेश के कई जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। विभाग ने अलवर, भरतपुर, झुंझुनूं, चूरू, बीकानेर, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में 'येलो अलर्ट' जारी किया है। इन क्षेत्रों में कहीं-कहीं मेघगर्जन के साथ हल्की वर्षा, बूंदाबांदी और 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।

सावधानी बरतने की अपील
बदलते मौसम और बिजली की चमक को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। विशेष रूप से:

  • मेघगर्जन के समय पेड़ों के नीचे शरण न लें।
  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्लग निकाल दें ताकि शॉर्ट सर्किट या नुकसान से बचा जा सके।
  • किसान अपनी कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर ढक कर रखें।मार्च के महीने में तापमान का यह उतार-चढ़ाव ग्लोबल वार्मिंग और पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) का मिला-जुला असर माना जा रहा है। फिलहाल, टपूकड़ा और आसपास के क्षेत्रों में किसान सरकार से फसलों के गिरदावरी और मुआवजे की आस लगाए बैठे हैं।