हनुमान मंदिर में 20 सालों से लगातार रामचरित मानस का अखंड पाठ

रामचरित मानस मे कहा गया है कि जो कपट, दम्भ और माया से परे हैं, वो ही भगवान श्री राम के कृपा पात्र है और जिन पर राम की कृपा है उन्हें कई सांसारिक दुख छू तक नहीं सकता। परमात्मा जिस पर कृपा कर देते हैं , उस पर तो सभी की कृपा अपने आप होने लगती है।

By: Dharmendra Adlakha

Published: 27 Jul 2020, 09:51 AM IST

जा पर कृपा राम की होई, ता पर कृपा करे सब कोई
भूरासिद्ध हनुमान मंदिर में वर्षों से रामचरित मानस पाठ कर रहे हैं लोग~


रामचरित मानस मे कहा गया है कि जो कपट, दम्भ और माया से परे हैं, वो ही भगवान श्री राम के कृपा पात्र है और जिन पर राम की कृपा है उन्हें कई सांसारिक दुख छू तक नहीं सकता। परमात्मा जिस पर कृपा कर देते हैं , उस पर तो सभी की कृपा अपने आप होने लगती है।
अलवर शहर में स्थित भूरासिद्ध हनुमान मंदिर में 20 सालों से लगातार रामचरित मानस का अखंड पाठ होने को श्रद्धालु भगवान श्रीराम का ही आशीर्वाद को ही मानते हैं जिसके कारण यह संभव हो पाया है। इस सेवा से जुड़े हुए कई लोग इसे पूर्व जन्मों के शुभ कर्मों को मानते हैं जिसके कारण वे इस पाठ को कर रहे हैं और सुन रहे हैं।
अलवर में इस अतुलनीय उदाहरण को जानने व देखने लोग दूर-दराज से भी आते हैं। इस बारे में कई श्रद्धालुओं ने अपने भाव इस प्रकार व्यक्त किए।

भगवान की अलवर पर कृपा है-
अलवर का यह सौभाग्य है जिसके एक मंदिर में 20 सालों से लगातार रामचरित मानस का पाठ हो रहा है। हमें ऐसे मंदिरों के दर्शन का सौभाग्य मिला है। लॉक डाउन में सभी मंदिर बंद हैं लेकिन भगवान का आशीर्वाद अलवर के साथ हैं। रामचरित मानस के पाठ अलवर की रक्षा कर रहे हैं।
- राकेश अरोड़ा, अध्यक्ष जिला पुरुषार्थी समिति, अलवर।
यह सभी के लिए गर्व है-
अलवर शहर में ही 20 सालों से रामचरित मानस का पाठ चल रहा है जिसको बढ़ाना चाहिए। इसके लिए सभी श्रद्धालुओं को आगे आना चाहिए। एक दिन ऐसा आएगा कि जब यहां रामचरित मानस का पाठ करते हुए 51 साल हो जाएंगे। यह हम सभी के लिए गर्व की बात है।
- राजाराम सोनी, सेवानिवृत्त शिक्षा अधिकारी, अलवर।
युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत-
अलवर में एक ऐसा मंदिर भी है जिसमें 20 वर्षों से रामचरित मानस का पाठ हो रहा है जिससे हम सभी धन्य है। राम चरित मानस के इस पाठ में युवाओं को भाग लेना चाहिए जिससे भगवान श्रीराम के जीवन दर्शन से प्रेरणा ले सके। यह युवाओं के लिए गौरव का विषय है।
- श्मशेर सिंह चौहान, युवा।
अलवर है तपोभूमि-
अलवर तो तपोभूमि रही है जहां भर्तृहरि से लेकर अब तक संत तपस्या करते हैं। यह बहुत शुभ संकेत है कि अलवर के भूरासिद्ध मंदिर में 20 सालों से रामचरित मानस का पाठ चल रहा है। हम भी यहां जाकर पाठ करके अपने आपको धन्य महसूस करेंगे।
-रजनीश जैमन, युवा।
आगे भी चलता रहे-
अलवर के एक मंदिर में 20 सालों से रामचरित मानस का पाठ हो रहा है जो सभी के लिए सुखदायक है। इसको हमें आगे बढ़ाना चाहिए जिससे यह परम्परा आगे चलती रहे। ऐसे रामचरित मानस के पाठ यदि सभी जगह हो तो हमें सुसंस्कार सिखने को मिलेंगे।
- मयंक खंडेलवाल, युवा, अलवर।

Dharmendra Adlakha
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned