
किशनगढ़बास (अलवर)। मेवात क्षेत्र में सरकार भले ही करोड़ों रुपए खर्च कर शिक्षा के स्तर को सुधारने के दावे और प्रयास कर रही हो, लेकिन धरातल पर शिक्षा का स्तर कितना सुधर पाया है, इसका एक नजारा किशनगढ़बास क्षेत्र के एक सरकारी विद्यालय में देखने को मिला है। अभी हाल ही में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के परीक्षा परिणाम ने किशनगढ़बास के गांव न्याणा के रायबिया की ढ़ाणी स्थित राजकीय प्रवेशिका संस्कृत विद्यालय ने सरकारी दावों की पोल खोल कर रख दी है। इधर रविवार को ग्रामीणों ने मामले में प्रदर्शन कर नाराजगी जताई।
रायबिया की ढ़ाणी स्थित राजकीय प्रवेशिका संस्कृत विद्यालय में 10वीं कक्षा में कुल 11 छात्र-छात्राएं थे, जिनमें 10 फेल हुए हैं तथा एक पूरक (सप्लीमेन्ट्री) आया है। इस स्कूल की कक्षा 10वीं का परीक्षा परिणाम सौ प्रतिशत बच्चे फेल होने पर स्टाफ के प्रति लोगों में रोष है। विद्यालय में कुल 150 छात्र अध्ययनरत हैं और प्रधानाध्यापक सहित कुल 6 अध्यापक हैं। छात्रों का कहना है कि कक्षा 10वीं का केवल कालांश लगता था।
स्कूल में पढ़ाने का कोई दबाव नहीं रहता था। बच्चे बाहर खेलते रहते थे। ग्रामीण मुफीद, शहजाद आदि ने आरोप लगाया कि स्कूल में टीचर नहीं पढ़ाते थे। तभी ऐसा रिज्लट आया है। इससे स्कूल की छवि तो खराब हुई है, साथ ही गांव का भी नाम खराब हुआ है। उन्होंने विद्यालय स्टाफ बदलने की सरकार से मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि विद्यालय स्टाफ नहीं बदला गया तो स्कूल के तालाबन्दी कर आन्दोलन करेंगे। विद्यालय में शौचालयों की हालत खराब है। दरवाजे टूटे हुए है। दीवारें जर्जर है।
आरोप गलत है
यह विद्यालय 2021 में क्रमोन्नत हुआ था। विद्यालय में 15 शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं। विद्यालय में 5 द्वितीय ग्रेड के और दो थर्ड ग्रेड पद रिक्त हैं। एक अन्य थर्ड ग्रेड एलए, एक शारीरिक शिक्षक एवं एक एलडीसी का पद भी रिक्त है। हिंदी, गणित, सामाजिक विज्ञान, संस्कृत में से किसी भी विषय का अध्यापक नहीं था। ग्रामीणों की ओर से पढ़ाई नहीं कराने का आरोप गलत है।
कैलाश चन्द, प्रधानाध्यापक राजकीय संस्कृत प्रवेशिका स्कूल रायबिया की ढाणी न्याणा, किशनगढ़बास।
Published on:
05 Jun 2023 03:22 pm
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