अलवर. अलवर जिले की आर्थिक व्यवस्था लाल प्याज पर टिकी है। जिले की आर्थिक उन्नति का आधार लाल प्याज होने से किसानों का इस फसल पर अधिक ध्यान रहता है। परम्परागत फसल के साथ किसान लाल प्याज की फसल को प्राथमिकता दे रहा है। जिले के ज्यादातर क्षेत्रों में लाल प्याज की बुवाई की जाती है और इस प्याज से किसान हर साल निहाल हो रहे हैं।
गत वर्षों में पूरे देश में प्याज के भाव बढ़े और इसी आस में किसानों ने अच्छा मुनाफा कमाने की उद्देश्य से किसान बहुतायत मात्रा में प्याज की बुवाई की है। मेवात अंचल में किसानों ने हर वर्ष प्याज की फसल को प्राथमिकता से बोया है। गत वर्षो में देश के कई राज्यों में बाढ़ आने के कारण अलवर जिले की प्याज की मांग पूरे देश में थी और प्याज ने किसानों को निहाल कर दिया था। इस बार किसान को प्याज की नकदी फसल से अच्छी आस है। शुक्रवार को भी अलवर जिले की प्याज मण्डी में प्याज की बम्पर आवक हुई है।
प्याज बीज की दरों में हुई बढ़ोतरी
वर्ष 2018 में प्याज का बीज 2800 से 3000 रुपए प्रति क्विंटल बिका था। वर्ष 2019 में बढकऱ 4000 से 4200 रुपए तक पहुंचा गया और वर्ष 2020 में 4500-5000 रुपए प्रति क्विंटल तक बिका था। औसत प्याज का बीज लगभग 5000-6000 रुपए प्रति क्विंटल है। ऐसे में गत तीन सालों में एक क्विंटल बीज की कीमत में 2000 से 3000 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। किसान को एक हैक्टेयर भूमि के लिए कम से कम 25 क्विंटल बीज की आवश्यकता पड़ती है। प्याज की बुवाई और फसल तैयार होने तक मजदूरी, खाद और दवाई का खर्चा 1 हैक्टेयर पर करीब 50 से 60 हजार रुपए बैठता है।