
रिलीफ सोसायटी ने बढ़ाया मरीजों का दर्द
सामान्य अस्पताल के सामने अंडरपास की संभावनाएं लगभग खत्म...ओवरब्रिज नहीं आएगा काम
- शहर का प्रमुख प्रोजेक्ट था अंडरपास, इसके बनने से हर दिन 40 हजार से अधिक लोगों को होता फायदा
- मरीज, अटेंडेंट, आमजन को क्रॉस नहीं करना पड़ता रोड, यहां लगने वाले जाम से मिलती निजात
अलवर. काफी प्रयास के बाद सामान्य अस्पताल से महिला अस्पताल को जोड़ने के लिए अंडरपास (भूमिगत मार्ग) का प्रोजेक्ट तैयार हुआ था लेकिन अब इसके बनने की आस लगभग खत्म हो गई है। इसकी जगह ओवरब्रिज की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। बताते हैं कि अंडरपास का प्रस्ताव केवल इसलिए निरस्त हुआ है कि अंडरपास में खर्च अधिक आएगा। उसका उपयोग भी कम है जबकि हकीकत अलग बताई जा रही है। खैर, अंडरपास के प्रस्ताव की खबर जिसे भी मिली उसने यही कहा, ये निर्णय ठीक नहीं है। यहां जरूरत अंडरपास की है। आमजन से लेकर नेता आदि ने भी मेडिकल रिलीफ सोसायटी से यही मांग की है कि मरीजों, आमजन को रिलीफ दें...दर्द नहीं।
इसी तरह खड़ा हुआ था ये प्रस्ताव
करीब नौ माह पहले मेडिकल रिलीफ सोसायटी के अध्यक्ष एवं तत्कालीन डीएम ने मरीजों, तीमारदारों व आमजन की परेशानियों को देखते हुए प्रस्ताव तैयार करवाया था कि यहां अंडरपास की जरूरत है। बताते हैं कि इस मार्ग का निरीक्षण खुद तत्कालीन डीएम, स्वास्थ्य विभाग व यूआईटी की टीम ने किया और ये माना था कि वाकई ये व्यस्ततम मार्ग है। मरीजों को सामान्य अस्पताल से महिला अस्पताल तक की दूरी तय करने के लिए पसीना बहाना पड़ता है। इससे रोड भी जाम होता है। ऐसे में यहां अंडरपास बनाया जाए। सोसायटी के प्रस्ताव के बाद यूआईटी को डिजाइन तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई। डिजाइन तैयार हो गया। इसके लिए करीब 6 करोड़ की मंजूरी मिल गई। इसकी राह में चार मेडिकल स्टोर आ रहे थे। इन्हें हटाने में स्वास्थ्य विभाग नाकाम रहा और इसके चलते काम शुरू नहीं हो पाया।
आमजन की मांग पर तैयार हुआ था ये ड्रीम प्रोजेक्ट
तत्कालीन डीएम ने साफ कह दिया था कि मेडिकल दुकानें हटाएं या फिर जबरन हटाई जाएंगी। क्योंकि आमजन को राहत देने वाला प्रोजेक्ट नहीं रुकेगा। बताते हैं कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई पहल नहीं की गई। इस अंडरपास को बनाने में रुचि नहीं ली गई। यूआईटी कार्यदायी संस्था थी। इंजीनियर इंतजार कर रहे थे कि दुकानें हटाकर स्वास्थ्य विभाग जमीन पर कब्जा दिलाएगा ताकि काम शुरू हो सके। इसके प्रयास चल ही रहे थे कि अब अंडरपास का प्रस्ताव लगभग निरस्त हो गया है। इसकी संभावनाएं नहीं बताई जा रही हैं। इससे लाखों लोगों को झटका लगा है। आमजन का कहना है कि ओवरब्रिज यहां काम नहीं आएगा। क्योंकि यहां एलेवेटिड रोड भी बनना प्रस्तावित है। पीएमओ डॉ. सुनील चौहान कहते हैं कि इसके लिए कमेटी बनाई गई है। अभी फाइनल रिपोर्ट आना बाकी है।
एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल जाने के लिए पसीने आते हैं। वाहन इतने निकलते हैं कि गुजरना आसान नहीं। यहां अंडरपास की जरूरत है। अंडरपास ही बनना चाहिए।
- हरपाल यादव, हसन खां मेवाती
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अंडरपास का प्रस्ताव सामने आया तो उम्मीद जगी कि अब आसानी से रोड पार हो जाएगा। अस्पतालों में जाने का रास्ता बन जाएगा लेकिन प्रस्ताव निरस्त करने से निराशा हाथ लगी है।
-पुष्पेंद्र तंवर, शांतिकुंज
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अस्पताल के सामने अंडरपास का प्रोजेक्ट शहर की राह आसान बनाता। मरीजों के अलावा आमजन को भी राहत मिलती लेकिन ये प्रस्ताव निरस्त होने से जनता को झटका लगा है। इस प्रकरण को ऊपर तक उठाया जाएगा।
- संजय शर्मा, शहर विधायक
अंडरपास निर्माण में खर्च भी अधिक आएगा और जरूरत भी कम मानी जा रही है। ऐसे में ओवरब्रिज की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इसके जरिए भी मरीज व आमजन आ-जा सकेंगे।
-- डॉ. श्रीराम शर्मा, सीएमएचओ
यूआईटी कार्यदायी एजेंसी है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग से जो भी कार्य उन्हें दिया जाएगा वह करेंगे। अंडरपास के लिए जमीन पर कब्जा भी स्वास्थ्य विभाग को ही दिलाना है।
-- अशोक कुमार योगी, सचिव यूआईटी
Published on:
26 Aug 2023 11:07 am
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