8 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

अवैध खनन के लिए पहाड़ो की चोटी तक बना दिए रास्ते

जिम्मेदारी की खामोशी के चलते हो रहा अवैध खननपहाड़ों में ब्लास्टिंग केेेेेे दौरान आती है मकानों में दरार
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

अलवर

•

image

Pradeep kumar yadav

•

Updated: 18 Apr 2022, 1:25 AM IST

अवैध खनन के लिए पहाड़ो की चोटी तक बना दिए रास्ते

अवैध खनन के लिए पहाड़ो की चोटी तक बना दिए रास्ते

अलवर. रामगढ़़ विधानसभा क्षेत्र में खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। रामगढ़ मुख्यालय से महज 3 से 4 किलोमीटर की दूरी में अवैध खनन माफिया ने पहाड़ों की चोटी तक रास्ते बना लिए हैं। खनन व वन विभाग के अधिकारी पहले की तुलना में अवैध खनन कम बता रहे हैं, लेकिन असलियत में अनेक जगह पर अवैध खनन अबाध गति से जारी है। आज भी रामगढ़ क्षेत्र के निकटवर्ती गांव मानकी, गुर्जर खुर्द, ओडेला, करौली, पूठी आदि क्षेत्र की पहाडिय़ों में अवैध खनन धड़ल्ले से हो रहा है। अवैध खनन रोकने की जिम्मेदारी खान, वन, पुलिस, प्रशासन व परिवहन विभाग की है, लेकिन कार्रवाई कागजी साबित हो रही है। यदि अवैध खनन इसी प्रकार चलता रहा तो पहाडिय़ां आंखों से ओझल हो जाएंगी।


गड़बड़ा जाएगा संतुलन
रामगढ़ क्षेत्र अरावली की पहाडिय़ों से घिरा है। पर्यावरण संतुलन में इन पहाडिय़ों का अहम योगदान है, लेकिन अवैध खनन से पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है। प्रशासन पहाड़ों को बचाने के लिए कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
पहाड़ सफाचट, नीचे खुदाई से बन गई झील
रामगढ़ क्षेत्र की पहाडिय़ों को खनन माफिया तेजी से साफ करने में लगे हैं। पट्टाधारक व ठेकेदार जमकर चांदी कूट रहे हैं। खनिज विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी आंखें मूंदे बैठा है। अवैध खनन का लंबे अर्से से विरोध कर रहे वहां के रहवासी बताते हैं कि पहाड़ों को सफाचट करने के बाद पट्टाधारक पहाड़ों को 250-300 फीट की गहराई तक खोद दिया है जिससे पानी निकलने से झील बन गई है।


बीमारियों का डर
पत्थर खदानों और क्रेशर में काम करने और इसके आसपास रहने वाले लोग कई तरह की बीमारियों से जूझ रहे हैं। घर के पास से खदान से पत्थर ढोने वाले भारी वाहन दिन-रात कच्ची सडक़ से गुजरते हैं जिससे दिनभर धूल उड़ती रहती है। ये धूल सांस, पानी और भोजन के जरिए शरीर में पहुंचकर बीमार करती है।


पहाडिय़ों की सम्पदा
इन पहाडिय़ों में पत्थर, गिट्टी वाले पत्थर, मिट्टी आदि निकालने, सडक़ बनाने व मकान निर्माण के लिए इन पहाडिय़ों को काटने की होड मची हुई है। जो पहाड़ सुबह के समय ऊंचा दिखाई देता है, अगली सुबह तक तो मशीनें उसे निगल लेती हैं। अवैध खनन से पहाडिय़ों पर रहने वाले वन्यजीवों का पलायन हो रहा है। ग्रामीणों ने अवैध ब्लास्टिंग और खनन को रुकवाने के लिए एसडीएम, जिला कलक्टर और मंत्री को पत्र लिखकर गुहार की है।


चंद पैसों के लिए चली जाती है जान
पहाडिय़ों में ब्लास्टिंग के दौरान चट्टानों के ढह जाने से अनेक मजदूरों व पहाड़ों के इर्द-गिर्द रहने वालों की जान जा चुकी है।