
अलवर. सेना में जाने की तैयारी कर रहे या मन बना चुके युवाओं के लिए यह जानना जरूरी है कि सेना में सबसे अधिक वो ही युवा सफल होते हैं जिनकी दौड़ अच्छी है। मतलब ये तय है कि 90 प्रतिशत उनका ही चयन होता है जो दौडऩे में शुरू से रुचि रखते हैं।
खास जानकारी यह भी है कि सेना भर्ती में एक बैच में अधिक युवाओं को दौड़ाया जाता है। उस समय यह सावधानी जरूरी है कि 1600 मीटर की दौड़ में कैसे दौड़ा जाए, अधिक भीड़ होने के कारण कोशिश करनी चाहिए कि पहले राउण्ड में आगे ही रहें। नहीं तो बाद में तीन राउण्ड में आगे निकलना मुश्किल हो जाता है। फिर दो राउण्ड सामान्य काटने के बाद आखिरी राउण्ड में पूरी ताकत लगा दें। सेना में 1600 मीटर दौड़ पांच मिनट व पांच सैकण्ड में पूरी करने की कोशिश करेंगे तभी आप सफल होंगे।
दौड़ के बाद दूसरा चरण
दौड़ के बाद दूसरा चरण शारीरिक दक्षता परीक्षा का है। जिसमें युवाओं से दस बीम लगवाई जाती हैं। लॉंग जम्प 12 फीट जरूरी है। कुछ बाधा चाल भी होती है। हालांकि ये सामान्य प्रक्रिया है। दौड़ पूरी करने के बाद शरीर की लम्बाई 170 सेमी और छाती 82 सेमी जरूरी है। दौड़ के बाद अधिकतर अधिकतर छाती सामान्य व 5 सेमी से अधिक नहीं फुला पाने के कारण असफल रहते हैं।
फिर मेडिकल की बारी
शारीरिक दक्षता परीक्षा में सफल रहने वालों का मेडिकल हेाता है। जिसमें पूरे शरीर की जांच होती है। आंख, नाक, कान, पैर, हाथ, गर्दन सहित प्राइवेट पार्ट की भी पूरी जांच होती है। सेना के डॉक्टरों की विशेष टीम मेडिकल करती है। मेडिकल में फिट होने का मतलब अभ्यर्थी को अब सिर्फ लिखित परीक्षा देनी है। अनफिट या रैफर किए जाते हैं। रैफर करने वाल ों को दूसरे सेना के अस्पतलों में जाकर पुन: जांच करानी होती है। इस बीच बनाए गए प्वाइंट में सुधार या फिट हो जाता है तो उसे आगामी सेना भर्ती में लिखित परीक्षा देने की अनुमति दी जाती है। अन्यथा अनफिट घोषित कर दिया जाता है।
Published on:
05 Jan 2018 06:30 pm
बड़ी खबरें
View Allअलवर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
