
राजस्थान के अलवर में स्थित है हजारों वर्ष पुराना नीलकंठ महादेव मंदिर, पूरी होती है भक्तों की मुराद
सावन मास में शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। सावन मास में अलवर के पांडवों के समय निर्मित हजारों वर्ष पुराने नीलकंठ महादेव मंदिर में भी भारी संख्या में दर्शनार्थी पहुंचते हैं। मान्यता है यहां सावन में दर्शन करने से मोक्ष की प्राप्ती होती है। अलवर से 65 किलोमीटर दूर स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर रमणीक होने के साथ भोले के भक्तों के लिए उनकी अटूट आस्था का केन्द्र भी है। यही वजह है कि श्रावण मास में यहां का नजारा अद्भुत होता है। यहां दिनभर भक्ति संगीत के साथ अनुष्ठान और पूजा-अर्चना का कार्यक्रम चलता है। भोलेनाथ के जयकारों से मंदिर परिसर गुंजायमान रहता है।
सात किलोमीटर का ऊबड़-खाबड़ और पथरीले रास्ते पर चलकर श्रद्धालु नीलकंठ महादेव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। राजस्थान के अलावा अन्य राज्यों से भी भक्तजन यहां आकर पूजा-अर्चना करते कर परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। सावन मास के सोमवार को श्रद्धालु जलाभिषेक व धार्मिक अनुष्ठान आदि कर भोलेनाथ को रिझाते हैं।
मंदिर का महत्व
नीलकंठ महादेव मंदिर स्थित शिवलिंग पूर्ण रूपेण नीलम पाषाण के बना है। यहां पाण्डवों के समय से ही अखण्ड ज्योत जलती आ रही है। पूर्व में यह नगर पारानगर के नाम से विख्यात था। प्राचीन संस्कृतियों की मूर्ति कलाकृतियों के पाषाणों से निर्मित पारानगर एवं नीलकंठ महादेव मंदिर इसका एक जीवंत उदाहरण है। मंदिर के गुम्बद व शिलाओं पर मूर्ति कलाकृतियां आज भी देखने को मिलती हैं। पारानगर के खण्डहर एवं अवशेष आज भी यहां मौजूद हैं। इस मंदिर को सन् 1970 के आसपास पुरातत्व विभाग ने अपने संरक्षण में ले रखा है। मंदिर की देखरेख के लिए यहां सदैव पुरातत्व विभाग के कर्मचारी एवं पुलिस जाप्ता तैनात रहता है।
भजन सत्संग और भण्डार
सावन मास में यहां प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में भक्तजन दूरदराज से आकर भोलेनाथ का दर्शन लाभ लेते हंै। मंदिर में अनुष्ठान व भजन सत्संग के अलावा भण्डारा आदि भी होता है। नीलकंठ महादेव के दर्शन के लिए नेता और वीआईपी लोगों का भी आना जाना लगा रहता है।
Published on:
31 Jul 2018 09:40 am
बड़ी खबरें
View Allअलवर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
