
गैस के लिए लम्बी लाइनों में लगकर इन्तजार करना पड़ रहा है (फोटो - पत्रिका)
19 अप्रैल को अक्षय तृतीया (आखा तीज) का बड़ा सावा है। इस मौके पर होने वाली सैकड़ों शादियों के बीच इस समय सबसे बड़ा विलेन 'रसोई गैस सिलेंडर' बना हुआ है। राजस्थान के अलवर जिले में जिला रसद विभाग (DSO) कार्यालय में लोग मिठाई के डिब्बे या सिफारिशी पत्र नहीं, बल्कि अपनी बेटियों और बेटों की शादी के कार्ड लेकर पहुंचे।
कार्यालय पहुंचे लोगों ने अधिकारियों के सामने शादी का निमंत्रण पत्र रखते हुए लिखित आवेदन दिया। लोगों का दर्द था कि वे पिछले 15-20 दिनों से गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। रिश्तेदारों और दोस्तों से सिलेंडर उधार मांगकर काम चलाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वहां भी निराशा हाथ लग रही है। 16 अप्रेल तक विभाग के पास 300 से अधिक आवेदन सिर्फ कमर्शियल सिलेंडर के लिए आ चुके थे।
शादी वाले परिवारों के लिए सरकार ने शहरी क्षेत्र में 3 और ग्रामीण क्षेत्रों में 2 कमर्शियल सिलेंडर देने के आदेश दिए हैं। लेकिन हकीकत यह है कि एक औसत शादी में 10 से 12 कमर्शियल सिलेंडरों की जरूरत होती है। वर्तमान में जिले की स्थिति चिंताजनक है:
परंपरा के अनुसार शादियों का पहला कार्ड गणेशजी को अर्पित किया जाता है। लाल दरवाजा स्थित गणेश मंदिर में भारी भीड़ उमड़ रही है। लेकिन इस बार विडंबना यह है कि भगवान को न्योता देने के बाद परिजनों की अगली दौड़ रसद विभाग की ओर हो रही है।
एक तरफ चूड़ी मार्केट, मुंशी बाजार और बजाजा बाजार में कपड़ों, गहनों और फर्नीचर की भारी खरीदारी से रौनक है, वहीं दूसरी ओर हलवाई और कैटरिंग के इंतजामों को लेकर परिवार तनाव में हैं। बिना पर्याप्त गैस के शादी की दावतों पर संकट मंडरा रहा है।
ज्योतिषियों के अनुसार इस साल शादियों की धूम लंबी रहने वाली है। 26 जुलाई देवशयनी एकादशी तक करीब 28 मुहूर्त हैं। इस साल अक्षय तृतीया के अलावा पीपल पूर्णिमा, जानकी नवमी और भड़ल्या नवमी जैसे 7 अबूझ मुहूर्त भी हैं। यदि रसद विभाग ने आपूर्ति सुचारू नहीं की, तो आने वाले सावे और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
Published on:
17 Apr 2026 01:13 pm
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