
सरकारी छात्रावासों में सुरक्षित नहीं है बालिकाएं, पढे़ यह खबर
यहां पर सुरक्षा के नाम पर केवल महिला सुरक्षा गार्ड लगाई गई है जो कि ठेके पर है और प्रशिक्षित नहीं हैं। अलवर में बालिकाओं के साथ हो रही आपराधिक घटनाओं को देखते हुए कैमरे लगाने की जरुरत है।
पूर्व में हो चुकी है घटनाएं , नहीं लिया सबक
गौरतलब है कि अलवर के किशनगढबास के बासकृपाल नगर में शिक्षा विभाग के छात्रावास में मार्च 2019 में हास्टल वार्डन व उसके पति ने बालिकाओं के साथ अप्रिय वारदात को अंजाम दिया था। इस मामले में आरोपियों पर कार्रवाई थी हुई थी। यहां बालिकाओं ने हिम्मत दिखाते हुए हॉस्टल वार्डन व उसके पति के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था लेकिन ज्यादातर मामलों को दबा दिया जाता है और बालिकाए आवाज नहीं उठाती हैं।
38 छात्रावासों में रह रहे हैं लगभग तीन हजार बालक बालिकाएंविभाग की ओर से संचालित छात्रावास योजना में अलवर जिले में बालक व बालिका छात्रावासों का संचालन किया जा रहा है। जिसमें अलवर जिले में करीब 38 छात्रावासों का संचालन किया जा रहा है। जिसमें तीन हजार से अधिक छात्र छात्राएं रह रहे हैं। ये छात्रावास अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछडा वर्ग, विशेष पिछडा वर्ग , आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, मिरासी एवं भिश्ती समुदाय के छात्र छात्राओं के लिए संचालित है। इसमें करीब एक दर्जन बालिका छात्रावास है।
अलवर शहर में संचालित छात्रावास स्वीकृत संख्या
देवनारायण बालिका छात्रावास कॉलेज स्तर जीडी कॉलेज एसबीसी 75राजकीय कॉलेज स्तर बालिका छात्रावास अंबेडकर नगर एससी 55
राजकीय देवनारायण बालिका छात्रावास अंबेडकर नगर एसबीसी 35सावित्री बाई फुले कन्या महाविद्यालय छात्रावास ट्रांसपोर्ट नगर एससी 45
राजकीय सावित्री बाई फुले कन्या छात्रावास अंबेडकर नगर एससी 55राजकीय सावित्री बाई फुले कन्या छात्रावास मालाखेडा 50
वर्जन
अलवर में सात बालिका छात्रावास संचालित है। सीसीटीवी कैमरों के लिए विभाग से बजट नहीं मिला है। बजट प्राप्त होने के बाद ही कैमरे लगाए जाएंगे। सभी में महिला सुरक्षा गार्ड लगाए गए हैं।
रविकांत, उपदनिदेशक, सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता विभाग, अलवर।
Published on:
05 Jan 2024 12:26 pm
