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Cyber Fraud: अब 1930 या 112 पर कॉल करते ही सीधे SHO के पास पहुंचेगी साइबर ठगी की शिकायत

साइबर ठगी के मामलों में अब लोगों को पुलिस थानों या साइबर सेल के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सरकार की नई तकनीक आधारित व्यवस्था के तहत 1930 या 112 नंबर पर कॉल करते ही शिकायत सीधे नजदीकी थाने के एसएचओ (SHO) के पास पहुंच जाएगी।
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cyber crime complaint

representative picture (AI)

साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच अब पीड़ितों को शिकायत दर्ज कराने के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। केंद्र सरकार ने साइबर ठगी के मामलों की रिपोर्टिंग और जांच व्यवस्था को अधिक सरल, तेज और तकनीक आधारित बनाने की तैयारी कर ली है।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद कोई भी व्यक्ति साइबर ठगी की शिकायत सीधे अपने नजदीकी थाने में दर्ज करा सकेगा। शिकायत दर्ज होने के बाद उसे संबंधित जिले की साइबर सेल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी पुलिस तंत्र की होगी।

नजदीकी थाने में स्थानांतरित

नई व्यवस्था के तहत साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के प्रावधानों के अनुरूप नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार की गई है। इसके अनुसार अब तक 1930 हेल्पलाइन पर आने वाली कॉल और 112 (इमरजेंसी सेवा) के जरिए दर्ज शिकायतों को सीधे नजदीकी थाने में स्थानांतरित किया जाएगा। थाने में मामला दर्ज होने के बाद आगे की कार्रवाई शुरू होगी।


नई प्रणाली को इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी), नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग हेल्पलाइन (1930) से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य शिकायत दर्ज होने से लेकर जांच शुरू होने तक की प्रक्रिया को एकीकृत और अधिक प्रभावी बनाना है।

सिस्टम में यूं होगा काम

कोई व्यक्ति 1930 या 112 पर कॉल करके शिकायत दर्ज कराता है, तो सिस्टम शिकायत को स्वतः संबंधित थाने के एसएचओ के पास भेज देगा। इसके बाद शिकायतकर्ता को उसके नजदीकी थाने से संपर्क कर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। शिकायत दर्ज होने के बाद पीड़ित को एक डिजिटल टिकट या डिजिटल केस संदर्भ संख्या भी उपलब्ध कराई जाएगी।

इस टिकट के माध्यम से वह अपनी शिकायत की स्थिति ऑनलाइन देख सकेगा। यह भी पता चल सकेगा कि मामला किस स्तर पर लंबित है और जांच किस अधिकारी के पास है। प्रत्येक जिले में साइबर फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन सपोर्ट सिस्टम लगाया जाएगा। यह सिस्टम 112 पर प्राप्त साइबर शिकायतों को अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत करेगा और मामले की गंभीरता के आधार पर जांच एजेंसियों की मदद करेगा।

कम्प्यूटर को साइबर अपराध पोर्टल से जोड़ेंगे

थानों में मौजूद कंप्यूटर सिस्टम को सीधे साइबर अपराध पोर्टल से जोड़ा जाएगा। थाने में शिकायत दर्ज करते ही पुलिसकर्मी के कंप्यूटर स्क्रीन पर पीड़ित का डिजिटल टिकट और उससे जुड़ी पूरी जानकारी दिखाई देगी। इससे अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर जानकारी दर्ज करने की आवश्यकता कम होगी और जांच में तेजी आएगी।

नई व्यवस्था में ऑपरेटर के लिए भी विशेष सुविधा दी गई है। यदि किसी पीड़ित की कॉल बीच में कट जाती है, तो सिस्टम में मौजूद कनेक्ट बटन दबाकर ऑपरेटर सीधे डिजिटल सिस्टम के जरिए पीड़ित से दोबारा संपर्क कर सकेगा।

अभी यूं हो रहा था काम

साइबर ठगी का शिकार व्यक्ति 1930 पर कॉल करता है। वहां शिकायत दर्ज करने के बाद नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के जरिए संबंधित राज्य की नोडल एजेंसी को दी जाती है। वहां से शिकायत पीड़ित के संबंधित थाने तक पहुंचती है। इस प्रोसेस में 48 घंटे का समय लगता है।