
सरिस्का से सुखद खबर, आग सिमटी, अपने विचरण क्षेत्र में ही नजर आए बाघिन व नन्हें राजकुमार
सरिस्का बाघ परियोजना से सुखद खबर है। जंगल की आग सिमट गई है। पांच दिन दावानल के बाद भी सरिस्का के बाघ व नन्हें राजकुमार सुरक्षित हैं। सरिस्का प्रशासन को बाघिन एसटी-17 व उसके दो शावक नारेंडी एनिकट के समीप नजर आए। आग के बाद भी बाघिन एसटी-17 ने अपनी टैरिटरी नहीं बदली है। बाघिन एसटी-17 व शावकों का नारेंडी एनिकट के आसपास ही मूवमेंट रहा। आग से पहले जहां बाघिन व शावकों की साइटिंग हुई थी, वन विभाग की टीम को उसी क्षेत्र में बाघिन व शावक नजर आए हैं। आग के दौरान सरिस्का व वन विभाग के अधिकारी बाघिन एसटी व शावकाें पर नजर बनाए हुए थे। लगातार बाघिन के पगमार्क को फॉलो किया। बाघिन के विचरण क्षेत्र के चारों तरफ वनकर्मियों ने सुरक्षा चैन बनाई। ऐहतियात के तौर पर अग्निशमन सिलेंडर व बचाव के अन्य उपकरण साथ रखे। आग से अन्य बाघों के विचरण क्षेत्र पर भी असर नहीं हुआ है। सरिस्का के अकबरपुर रेंज के बालेटा, पृथ्वीपुरा का जंगल बाघ एसटी-20 व एसटी-23 का आवास है। आग सिमटने के बाद अब यह बाघ भी सुरक्षित हैं।
जूते-चप्पल जले, फिर भी डटे रहे वनकर्मी
सरिस्का में आग के दौरान सरिस्का, अलवर व अन्य जिलों के वनकर्मी पांच दिनों तक जंगल में डटे रहे। ऑपरेशन के दौरान कई वनकर्मियों के जूते-चप्पल जल गए, ग्रामीणों को चोट आई, मधुमक्खियों ने डंक मारे, तमाम परेशानियों के बीच वनकर्मी लगातार जुटे रहे और आग पर नियंत्रण पाया। राज्य के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अरिंदम तोमर, सरिस्का के क्षेत्र निदेशक आर.एन.मीणा, डीएफओ सुदर्शन शर्मा सहित अन्य अधिकारियों ने आग पर नियंत्रण के बाद वनकर्मियों के पास जाकर उनके कार्य की सराहना की व हौसला बढ़ाया।
आग के दौरान भी बेहतर रहा पर्यटन
सरिस्का वन क्षेत्र में पांच दिन आग के कारण चिंताजनक हालात बने रहे, लेकिन इस दौरान पर्यटन बेहतर रहा। सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान में बड़ी संख्या में पर्यटकों ने सफारी का आनंद लिया। पर्यटकों को वन्यजीवों की साइटिंग भी हुई। अधिकारियों का कहना है कि वीकेंड पर भी बड़ी संख्या में पर्यटकों की प्री-बुकिंग हुई है।
Published on:
01 Apr 2022 05:56 pm
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