
सरिस्का के जंगल में अठखेलियां करता बाघ
सरिस्का टाइगर रिजर्व के दीर्घकालिक संरक्षण और बाघों के सुरक्षित भविष्य के लिए विशेषज्ञों ने सरिस्का को आसपास के वन क्षेत्रों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया है। उनका मानना है कि सरिस्का और जमवारामगढ़ के बीच वन्यजीव कॉरिडोर विकसित करने के साथ-साथ राजगढ़, बैराठ और दौसा के जंगलों को भी इससे जोड़ा जाना चाहिए, ताकि बाघों और अन्य वन्यजीवों को स्वच्छंद आवागमन का सुरक्षित मार्ग मिल सके।
रिटायर्ड सहायक वन संरक्षक विनोद शर्मा कहते हैं कि देश के 55 टाइगर रिजर्व में सरिस्का ऐसा एकमात्र टाइगर रिजर्व है, जिसके लिए अभी तक प्रभावी वन्यजीव कॉरिडोर विकसित नहीं हो पाया है। यही कारण है कि यहां बाघों की प्राकृतिक आवाजाही सीमित रहती है। आबादी एरिया में भी ये वन्यजीव आते हैं। वर्तमान में सरिस्का का क्षेत्रफल 1213 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यदि जमवारामगढ़, राजगढ़, दौसा और बैराठ के लगभग 650 वर्ग किलोमीटर अतिरिक्त वन क्षेत्र को कॉरिडोर के माध्यम से जोड़ा जाता है, तो यह पूरे परिदृश्य को एक बड़े वन्यजीव लैंडस्केप में बदल सकता है। इससे बाघों को नए क्षेत्र मिलेंगे, जैव विविधता बढ़ेगी और मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावनाएं भी कम होंगी।
रिटायर्ड क्षेत्र निदेशक सरिस्का आरएस शेखावत ने कहा कि सरिस्का टाइगर रिजर्व से जमवारामगढ़ का जंगल सीधे जोड़कर कॉरिडोर बना सकते हैं, जिससे बाघ सीधे दूसरे जंगल में जा सकेंगे। इसके साथ ही बैराठ, दौसा, राजगढ़ का जंगल सरिस्का में शामिल जल्द किया जाना चाहिए, क्योंकि जिस गति से आबादी बढ़ रही है, उसी गति से ऐसे निर्णय लेने होंगे। अन्यथा जंगल छोटा होगा, तो वन्यजीव आबादी की ओर भी निकल सकते हैं। करीब 650 वर्ग किमी का नया जंगल मिलेगा, तो बाघ स्वच्छंद विचरण करेंगे। साथ ही सरिस्का के बफर क्षेत्र को बड़ा करना चाहिए। बफर एरिया बड़ा होने से वन्यजीवों के लिए आवागमन के रास्ते अधिक चौड़े और सुरक्षित बनेंगे। साथ ही संरक्षण प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार जिले में 207 हिस्ट्रीशीटर हैं। इनमें सबसे ज्यादा शहरी क्षेत्र में 85 हिस्ट्रीशीटर हैं। थानों के हिसाब से सर्वाधिक कोतवाली थाना क्षेत्र में 27 और अरावली थाना क्षेत्र में 17 हिस्ट्रीशीटर हैं। उधर, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार शर्मा ने साफ किया है कि अगर राज्य में किसी भी हिस्ट्रीशीटर ने कोई अपराध किया, तो सिर्फ थानाधिकारी (एसएचओ) ही नहीं, बल्कि उस जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) भी सीधे जिम्मेदार माने जाएंगे। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई समीक्षा बैठक में बदमाशों पर निगरानी का सिस्टम मजबूत करने के निर्देश दिए। वीसी में पांच साल से ज्यादा पुराने और अनसुलझे (अनट्रेस) हत्या के मामलों को जल्द से जल्द निपटाने के निर्देश दिए गए। ऐसे सभी मामलों की जांच रेंज आइजी और एसपी अपनी निगरानी में करवाएं।
Published on:
17 Jun 2026 11:23 am
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