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राजस्थान में सबसे ज्यादा भगोड़े अपराधी अलवर में, 984 अब भी फरार; DGP बोले- वारदात हुई तो SP भी होंगे जिम्मेदार

Rajasthan Absconding Criminals: राजस्थान में फरार अपराधी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। प्रदेश में अलवर जिला 984 फरार अपराधियों के साथ शीर्ष पर है। आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जनवरी से अप्रैल तक राज्य में कुल 12,408 भगोड़े दर्ज थे, जिनमें से कार्रवाई के बाद भी 11,486 आरोपी अभी भी फरार हैं।

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अलवर

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Arvind Rao

Jun 17, 2026

Rajasthan Absconding Criminals

Rajasthan Alwar Absconding Criminals (Photo-AI)

Rajasthan Alwar Absconding Criminals: अलवर: राजस्थान में भगोड़े अपराधी पुलिस के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं। अलवर जिला फरार अपराधियों के मामले में प्रदेश में नंबर एक पर है। यहां करीब 984 अपराधी आज भी पुलिस गिरफ्त से दूर हैं। प्रदेश में इस वर्ष जनवरी से अप्रैल तक 12 हजार 408 भगोड़े रिकॉर्ड में दर्ज थे।

बता दें कि पुलिस ने 683 को गिरफ्तार किया और 239 मामले खारिज कर दिए। इसके बाद भी 11 हजार 486 आरोपी अब भी फरार चल रहे हैं। वांटेड अपराधियों पर पुलिस ने एक हजार से लेकर एक लाख रुपए तक का इनाम घोषित कर रखा है।

चला रखा है विशेष अभियान

अलवर में हत्या, लूट, डकैती, अवैध हथियार, गोतस्करी और संगठित अपराध से जुड़े कई आरोपी लंबे समय से गिरफ्तारी से बचते आ रहे हैं। इनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस साल 2025 से विशेष अभियान चला रही है।

थानों की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं और संदिग्ध ठिकानों पर निगरानी रखी जा रही है। हालांकि, कई बार अपराधियों को पूर्व में सूचना मिल जाती है, इस वजह से पुलिस के पहुंचने से पहले ही वे फरार हो जाते हैं।

रेंज में जयपुर अव्वल

आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक 2,647 फरार अपराधी जयपुर रेंज के थानों में दर्ज हैं। इसके बाद जयपुर कमिश्नरेट में 2,176 और भरतपुर रेंज में 1,408 अपराधी पकड़े नहीं जा सके हैं।

जिलों में अलवर 984 फरार आरोपियों के साथ प्रदेश में शीर्ष पर है। इसके बाद जयपुर पश्चिम 769, डीग 630, जयपुर पूर्व 627 और उदयपुर 533 का नंबर आता है। भगोड़े अपराधी पकड़ने में भरतपुर रेंज 240 और जयपुर रेंज 125 आगे रहे हैं।

डीजीपी का फरमान- इन्होंने वारदात की तो एसपी भी होंगे जिम्मेदार

पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार शर्मा ने साफ किया है कि अगर राज्य में किसी भी हिस्ट्रीशीटर ने कोई अपराध किया, तो सिर्फ थानाधिकारी (एसएचओ) ही नहीं, बल्कि उस जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) भी सीधे जिम्मेदार माने जाएंगे। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई समीक्षा बैठक में बदमाशों पर निगरानी का सिस्टम मजबूत करने के निर्देश दिए।

वीसी में पांच साल से ज्यादा पुराने और अनसुलझे (अनट्रेस) हत्या के मामलों को जल्द से जल्द निपटाने के निर्देश दिए गए। ऐसे सभी मामलों की जांच रेंज आइजी और एसपी अपनी निगरानी में करवाएं।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, जिले में 207 हिस्ट्रीशीटर हैं। इनमें सबसे ज्यादा शहरी क्षेत्र में 85 हिस्ट्रीशीटर हैं। थानों के हिसाब से सर्वाधिक कोतवाली थाना क्षेत्र में 27 और अरावली थाना क्षेत्र में 17 हिस्ट्रीशीटर हैं।