2 नवंबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सरिस्का के इको सेंसेटिव जोन में अटक गया पेंच

सरकारी फाइल से सरिस्का का इको सेंसेटिव जोन कब बाहर आएगा, यह खुद सरकार को भी पता नहीं है। इको सेंसेटिव जोन का पुराना प्रस्ताव हुआ अमान्य, अब नया प्रारूप जारी कर फिर से लोगों से आपत्ति मांगी, आपत्ति मांगने की 60 दिन की अवधि भी पूरी हो गई, लेकिन सरिस्का का इको सेंसेटिव जोन फाइलों से बाहर नहीं निकल सका।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

अलवर

•

image

Prem Pathak

•

Updated: 6 Jan 2024, 11:42 PM IST

सरिस्का के इको सेंसेटिव जोन में अटक गया पेंच

सरिस्का के इको सेंसेटिव जोन में अटक गया पेंच


सरकार के लचर सिस्टम का अंदाजा सरिस्का टाइगर रिजर्व के ईको सेंसेटिव जोन की प्रक्रिया से सहज लगाया जा सकता है। दो साल से ज्यादा समय तो इसके प्रारूप पर आमजन से आपत्ति मांगने में निकल गए, वहीं इनके निस्तारण के बाद यह प्रस्ताव सरकारी फाइलों से बाहर कब निकल पाएगा, इसका भी अंदाजा लगाना मुश्किल है।
सरिस्का टाइगर रिजर्व का इको सेंसेटिव जोन के प्रारूप का अंतिम प्रकाशन किया जाना है। अभी यह प्रस्ताव अभी राज्य सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अधीन प्रक्रियाधीन है। इससे पूर्व इको सेंसेटिव जोन का प्रस्ताव एक साल से ज्यादा समय तक राज्य सरकार के पास रह चुका।

मियाद निकली तो प्रस्ताव हुआ अमान्य

इको सेंसेटिव जाेन के सम्बन्ध में प्रावधान है कि यदि प्रस्ताव 725 दिन में अंतिम प्रकाशन नहीं हो पाता है तो वह प्रस्ताव अमान्य हो जाता है। पूर्व में तैयार किए गए सरिस्का के इको सेंसेटिव जोन के प्रस्ताव का 725 दिन में अंतिम प्रकाशन नहीं हो पाया। पूर्व में यह प्रस्ताव राज्य सरकार के समक्ष लंबे समय तक विचाराधीन रहा। इस पर आमजन की आपत्ति भी मांगी गई और बाद में टिप्पणी के साथ केन्द्र सरकार को भेजा गया, लेकिन इस प्रक्रिया में अनिवार्य 725 दिन की अवधि पूरी हो गई, इस कारण प्रस्ताव को अमान्य कर नए सिरे से सरिस्का के इको सेंसेटिव जोन का प्रस्ताव तैयार कर गत 2 नवम्बर को प्रारूप प्रकाशन के बाद 60 दिन में आमजन से आपत्ति मांगी गई। यह अवधि भी पूरी हो चुकी है। अब राज्य सरकार अपनी टिप्पणी के साथ इस प्रस्ताव को फिर केन्द्र सरकार के समक्ष भेजेगी, जिसके बाद ही केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय सरिस्का के इको सेंसेटिव जोन की अंतिम अधिसूचना जारी हो सकेगी।

अब और कितना इंतजार

सरिस्का के इको सेंसेटिव जोन की अंतिम प्रकाशन के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। कारण है कि इस प्रस्ताव पर आमजन की प्राप्त आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। उसके बाद भी राज्य सरकार इस प्रस्ताव को केन्द्र को भेजेगा, फिर बाद में सरिस्का के इको सेंसेटिव जोन की अंतिम अधिसूचना जारी हो सकेगी।

इको सेंसेटिव जोन प्रस्ताव का प्रारूप

दिशा सरिस्का बाघ रिजर्व से सरिस्का और जमवारामगढ़ रिजर्व से
उत्तर समान रूप से 0 किमी 01 किमी से 23 किमी

उत्तर- पूर्व समान रूप से 0 किमी 01 किमी से 24 किमी
पूर्व 0 किमी से 01 किमी 01 किमी से 19 किमी

दक्षिण- पूर्व 0 किमी से 01 किमी 01 किमी से 10 किमी
दक्षिण 0 किमी से 01 किमी 01 किमी से 10 किमी

दक्षिण- पश्चिम 0 किमी से 01 किमी समान रूप से 01 किमी
पश्चिम 0 किमी से 01 किमी 01 किमी से 04 किमी

उत्तर- पश्चिम समान रूप से 0 किमी 01 किमीसे 19 किमी

अधिसूचना में देरी से जिले को यह नुकसान

सरिस्का टाइगर रिजर्व के इको सेंसेटिव जोन की अंतिम अधिसूचना में देरी से अलवर जिले को सबसे बड़ा नुकसान रोजगार एवं राजस्व का हो रहा है। इस प्रस्ताव की देरी का सबसे बड़ा प्रभाव खनन क्षेत्र एवं मिनरल उद्योगों पर पड़ रहा है। वहीं सरिस्का की भूमि पर अतिक्रमण, ग्रामीणों से जमीनी विवाद के साथ ही होटल व्यवसाय भी रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। इसका सीधा असर सरिस्का के पर्यटन पर भी पड़ रहा है।