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सरिस्का के सीमांकन के फेर में उलझा पर्यटन, रोजगार व विकास

सरिस्का बाघ परियोजना के सीमांकन के फेर में जिले का विकास, पर्यटन एवं रोजगार उलझकर रह गया है, 14 साल के लंबे इंतजार के बाद सरिस्का की सीमाओं का सीमांकन नहीं हो पाने से वनकर्मियों एवं ग्रामीणों के बीच रोजमर्रा के होने वाले विवाद नहीं थम पा रहे हैं और न ही सरिस्का के आसपास मार्बल व अन्य खनिज भंडार का दोहन नहीं होने का क्षेत्रीय लोगों के रोजगार पर सीधा असर पड़ रहा है।

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अलवर

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Prem Pathak

Sep 29, 2021

sariska news

सरिस्का के सीमांकन के फेर में उलझा पर्यटन, रोजगार व विकास,सरिस्का के सीमांकन के फेर में उलझा पर्यटन, रोजगार व विकास

अलवर. सरिस्का बाघ परियोजना के सीमांकन के फेर में जिले का विकास, पर्यटन एवं रोजगार उलझकर रह गया है, 14 साल के लंबे इंतजार के बाद सरिस्का की सीमाओं का सीमांकन नहीं हो पाने से वनकर्मियों एवं ग्रामीणों के बीच रोजमर्रा के होने वाले विवाद नहीं थम पा रहे हैं और न ही सरिस्का के आसपास मार्बल व अन्य खनिज भंडार का दोहन नहीं होने का क्षेत्रीय लोगों के रोजगार पर सीधा असर पड़ रहा है।

सरिस्का के बहुप्रतिक्षित इको सेंसेटिव जोन का ड्राफ्ट पब्लिकेशन पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से गत 4 मार्च को जारी कर दिया गया है। प्रारूप अधिसूचना जारी होने की तिथि से 60 दिन में लोगों से सुझाव व आपत्ति मांगी गई। इसके बाद सरकार को इको सेंसेटिव जोन के ड्राफ्ट पब्लिकेशन में संशोधन कर अंतिम प्रकाशन करना था। छह महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी सरिस्का बाघ परियोजना के इको सेंसेटिव जोन का अब तक अंतिम प्रकाशन नहीं हो पाया है।

अंतिम प्रकाशन होने का यह होता लाभ

इको सेंसेटिव जोन को अंतिम रूप मिलने से सरिस्का टाइगर रिजर्व के 0 मीटर से एक किलोमीटर के दायरे में वैध एवं अवैध खनन गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगना संभव होता। पूर्व में नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड एवं स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड की ओर से सरिस्का से 10 किलोमीटर क्षेत्र में खनन क्षेत्र प्रतिबंधित किया गया था। इको सेंसेटिव जोन घोषित नहीं होने का सबसे ज्यादा प्रभाव खनन क्षेत्र पर पड़ा है।

यह है इको सेंसेटिव जोन के मापदण्ड

इको सेंसेटिव जोन का विस्तार सरिस्का बाघ रिजर्व के चारों ओर 0 से 1 किलोमीटर तक फैला हुआ है। इको सेंसेटिव जोन का क्षेत्रफल 207.77 वर्ग किलोमीटर है। राज्य सरकार की ओर से दी गई सूचना के अनुसार राजगढ़, टहला क्षेत्र में बाघ रिजर्व का बफर क्षेत्र एक किलोमीटर है और अलवर शहर वन सीमा के निकट विद्यमान है। इसलिए इको सेंसेटिव जोन का विस्तार अलवर शहर के समीप शून्य है। वहीं जमवारामगढ़ में यह सीमा शून्य रहेगी।

सीमांकन नहीं होने का यह विपरीत असर

सरिस्का के इको सेंसेटिव जोन का अंतिम प्रकाशन नहीं होने का सबसे ज्यादा असर जिले के विकास एवं रोजगार पर पड़ा है। सरिस्का के आसपास अरावली की पहाडिय़ां व विभिन्न खनिज का भंडार है। इको सेंसेटिव जोन का निर्धारण नही होने से सरिस्का के आसपास खनन पर रोक लगी हुई है। खनन पर रोक का नुकसान यह हुआ कि मार्बल व अन्य खनिज का दोहन नहीं हो पा रहा है। इसका सीधा असर रोजगार एवं जिले को खनिज रॉयल्टी के नुकसान के रूप में हुआ है। वहीं सरिस्का के आसपास होटल निर्माण पर रोक होने से पर्यटकों का सरिस्का के प्रति आकर्षण कम हुआ है। इस कारण सरिस्का में पर्यटन कम हुआ है और स्थानीय लोगों को पर्यटन से अपेक्षित रोजगार नहीं मिल सका है।