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पर्यटकों से करोड़ों की आय, फिर भी सरकार को इलेक्टि्रक बस नहीं भाय

अलवर. टाइगर रिजर्व सरिस्का अलवर जिला ही नहीं बल्कि पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एनसीआर का इकलौता टाइगर रिजर्व है, लेकिन हर साल 50 हजार से ज्यादा वाहनों के प्रवेश के चलते एनसीआर को प्राणवायु देने वाली बाघ परियोजना अब खुद गैस चैम्बर में तब्दील हो वन्यजीवों व पर्यटकों को प्रदूषण से सुरक्षा कवच दे पाने को मोहताज है।
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अलवर

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Prem Pathak

May 20, 2023

पर्यटकों से करोड़ों की आय, फिर भी सरकार को इलेक्टि्रक बस नहीं भाय

पर्यटकों से करोड़ों की आय, फिर भी सरकार को इलेक्टि्रक बस नहीं भाय

अलवर. टाइगर रिजर्व सरिस्का अलवर जिला ही नहीं बल्कि पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एनसीआर का इकलौता टाइगर रिजर्व है, लेकिन हर साल 50 हजार से ज्यादा वाहनों के प्रवेश के चलते एनसीआर को प्राणवायु देने वाली बाघ परियोजना अब खुद गैस चैम्बर में तब्दील हो वन्यजीवों व पर्यटकों को प्रदूषण से सुरक्षा कवच दे पाने को मोहताज है।सरिस्का बाघ परियोजना में हर साल 50 हजार से ज्यादा देशी व विदेशी पर्यटक आते हैं। वहीं इससे भी ज्यादा संख्या में दो पहिया व तीन पहिया वाहनों को प्रवेश दिया जाता है। इतनी बड़ी संख्या में वाहनों के सरिस्का में प्रवेश करने से जंगल में पेट्रोल- डीजल से उत्पन्न जहरीली गैस एवं प्रदूषण का खतरा बढ़ रहा है।

वन्यजीवों के लिए नुकसानदेह

सरिस्का में वाहनों के प्रवेश से उत्पन्न प्रदूषण की समस्या न केवल बाघ- बघेरों बल्कि सरिस्का भ्रमण पर आने वाले पर्यटकों के साथ ही यहां सुरक्षा में लगे वनकर्मियों के लिए भी खतरा है। यह िस्थति तो तब है जब सरिस्का टाइगर रिजर्व को एनसीआर का प्राणवायु केन्द्र माना जाता है। यहां बड़ी संख्या में वनस्पति, पेड़- पौधे बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन का उत्सर्जन करते हैं। एनसीआर में अन्य कोई नेशनल पार्क या टाइगर रिजर्व नहीं होने के कारण इतनी बड़ी मात्रा में पेड़- पौधे नहीं है। इस कारण से यहां उत्सर्जित ऑक्सीजन पूरे एनसीआर के लिए प्राणवायु देने का कार्य करती है। लेकिन सरिस्का में पेट्रोल- डीजल चलित वाहनों की भरमार होने से यहां की प्राणवायु भी अब दूषित होने लगी है।

इलेक्टि्रक बस व जिप्सी है प्रदूषण रोकने का उपाय

सरिस्का टाइगर रिजर्व में वाहनों की भरमार से बढ़ते प्रदूषण की समस्या पर काबू पाने के लिए इलेक्टि्रक बस व जिप्सी का संचालन ही एक मात्र उपाय है। पाण्डुपोल जाने वाले धार्मिक पर्यटकों के लिए इलेक्टि्रक बसें एवं पर्यटकों को सफारी के लिए बैटरी चलित जिप्सी व कैंटर का संचालन जरूरी है। इससे सरिस्का में बढ़ने वाले प्रदूषण की समस्या से निजात मिलना संभव होगा।

सरकारी तिजोरी में करोड़ों की आय

पर्यटकों की सफारी एवं वाहनों के प्रवेश शुल्क से सरकार को हर साल सरिस्का से एक से डेढ़ करोड़ रुपए की आय होती है। इतनी राशि में सरकार सहज ही सरिस्का के लिए इलेक्टि्रक बसें खरीद कर संचालन के लिए दे सकती है। सरकार स्तर के उच्च अधिकारियों को केवल इलेक्टि्रक बसों की खरीद का निर्णय एवं आदेश करने की जरूरत है। इलेक्टि्रक वाहनों के संचालन से सरिस्का टाइगर रिजर्व का प्रदूषण की मार से बचना आसान हो सकेगा।

सरिस्का वाहन ही नहीं आय भी खूब

वर्ष वाहन प्रवेश शुल्क इको डवलपमेंट योग

2017-18 54286 4052268 9946125 13998393

2018-19 57343 4044473 10194078 14238551

2019-20 57996 4345562 11112213 15457775

2020-21 18200 1362788 4084348 5447136

2021-22 38959 7189563 14664905 21854468

2022-23 36971 7156054 15349363 22505417

योग 153271 28150708 65351032 93501740