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एनटीसीए का प्रोटोकॉल पूरा होने को, सरिस्का में बाघ एसटी 13 का नही चला पता

बाघ के गुम हो जाने पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण एनटीसीए का 90 दिन तक तलाश का प्रोटोकॉल पूरा होने में कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन सरिस्का बाघ परियोजना में लापता बाघ एसटी-13 का अब तक पता नहीं चल सका है।

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अलवर

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Prem Pathak

Apr 11, 2022

एनटीसीए का प्रोटोकॉल पूरा होने को, सरिस्का में बाघ एसटी 13 का नही चला पता

एनटीसीए का प्रोटोकॉल पूरा होने को, सरिस्का में बाघ एसटी 13 का नही चला पता

अलवर. बाघ के गुम हो जाने पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण एनटीसीए का 90 दिन तक तलाश का प्रोटोकॉल पूरा होने में कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन सरिस्का बाघ परियोजना में लापता बाघ एसटी-13 का अब तक पता नहीं चल सका है। इनाम घोषित होने के बाद भी ग्रामीणों की बाघ एसटी-13 को लेकर साधी चुप्पी आगामी दिनों में सरिस्का के लिए भारी पड़ सकती है।

सरिस्का में बाघ एसटी- 13 को गायब हुए तीन महीने के समय में कुछ ही दिन बचे हैं, लेकिन अब तक बाघ के कोई साक्ष्य नहीं मिल पाए हैं। हालांकि सरिस्का प्रशासन के रिकॉर्ड में बाघ एसटी-13 सहित कुल कुनबा 27 ही दर्ज है, लेकिन जंगल में एक बाघ गायब है। एनटीसीए का 90 दिन तलाश का प्रोटोकॉल पूरा होने में चार- पांच दिन ही बचे हैं, इसके बाद ही बाघ के लापता होने की उच्च स्तरीय जांच और रिकॉर्ड की दुरुस्ती की कार्रवाई होने की उम्मीद है।

गत 15 फरवरी से नहीं मिले बाघ के साक्ष्य

सरिस्का में बाघ एसटी-13 के किसी प्रकार के साक्ष्य गत 15 फरवरी के बाद वनकर्मियों को नहीं मिल सके हैं। बाघ की खूब तलाश भी की गई, लेकिन कामयाबी नहीं मिली।

90 दिन बाघ की तलाश का प्रोटोकॉल

एनटीसीए की ओर से 90 दिन बाघ की तलाश करने का प्रोटोकॉल है। इस अवधि में बाघ के साक्ष्य नहीं मिलने पर जांच व बाघ को लापता घोषित करने की कार्रवाई का प्रावधान है।

मुखबिर तंत्र भी नहीं खोल रहा मुंह

सरिस्का में पहले भी बाघों के कई दिनों तक साक्ष्य नहीं मिलने की घटनाएं हुई हैं। लेकिन ज्यादातर बार मुखबिर व ग्रामीणों ने बाघों की जानकारी सरिस्का प्रशासन तक पहुंचाई, नतीजतन बाघों को तलाश करने में आसानी रही और कुछ दिन बाद ही बाघ मिल भी गए। लेकिन इस बार सरिस्का में िस्थति उलट है। बाघ एसटी-13 के साक्ष्य को लेकर न तो कोई मुखबिर और न ही ग्रामीण कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। बाघ एसटी-13 के अब तक कोई साक्ष्य नहीं मिल पाने में ग्रामीणों की चुप्पी भी बड़ा कारण रही है।

ग्रामीणों की चुप्पी सरिस्का के लिए खतरे का अलार्म

सरिस्का में वनकर्मियों की संख्या स्वीकृत की तुलना में एक चौथाई भी नहीं है। इस कारण सुरक्षा का भार बॉर्डर होमगार्ड, होमगार्ड एवं मुखबिरों पर रहता है। इसमें भी बड़ी भूमिका आसपास रहने वाले ग्रामीण मुखबिरों की रहती है, लेकिन अब सरिस्का का मुखबिर तंत्र कमजोर पड़ने से आगामी समय में सरिस्का के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है।

ग्रामीणों से पूछताछ में भी नहीं चला पता

बाघ एसटी-13 काे लेकर वनकर्मियों ने ग्रामीणों से खूब पूछताछ की, लेकिन कहीं से भी बाघ के बारे में जानकारी नहीं मिली। ग्रामीणों को उनका नाम गुप्त रखने का भी भरोसा दिलाया गया है।

सुदर्शन शर्मा

डीएफओ, सरिस्का बाघ परियोजना