
बेहद खतरे में है सरिस्का की सुरक्षा, कैसे बचेंगे वन्यजीव?
नील गाय रक्षा आंदोलन और शाकाहारी समिति ने राज्य में वन्य जीवन नील गायों की सरपंचों से अनुमति लेकर उन्हें मारने के आदेश को निरस्त करने की मांग की है।
समिति के मंत्री व समाजसेवी ओमप्रकाश गुप्ता ने आरोप लगाया है कि एक तरफ राजस्थान सरकार भारी जन विरोध मुखर होने के बाद भी वन्य जीव नील गायों की फसल रक्षा के नाम पर सरपंचों से अनुमति लेकर हत्या करने के अपने क्रूर फरमान को रद्द करने के बाबत अभी तक टस से मस नहीं हो रही है ।
गुप्ता के अनुसार सरिस्का अभयारण्य इलाके में बाघिन की हत्या का कोई पहला मामला नहीं है बल्कि इससे पूर्व भी एक बाघ का शिकार हो चुका। सन् 2004 में तो सम्पूर्ण सरिस्का ही बाघ विहीन हो गया था। करीब-करीब सारे बाघ-बाघिन शिकारियों के हत्थे चढ़ गए थे। इस पर प्रधानमंत्री स्तर तक मामले को बहुत गंभीरता से लेते हुए कड़ी सुरक्षा के साथ पुन: उसे बाघों से आबाद किए जाने की उच्च स्तर पर व्यूह रचना तैयार हुई। नतीजन वह शुभ घड़ी आईऔर सन् 2008 में सरिस्का को कई बाघ-बाघिन बाहर से लाकर पुन: आबाद किया गया।
तब से लेकर आज तक सरिस्का विश्व भर में फिर से अपनी खोई प्रतिष्ठा को हांसिल करता आ रहा है परंतु गंभीर पहलू यह है कि सरिस्का की सुरक्षा पर एक बार बड़े गंभीर सवाल पुन: खड़े हो गए हैं। अब लापता बाघिन की सरिस्का क्षेत्र में ही पेशेवर शिकारियों की ओर से गोली मार कर हत्या किए जाने के खुलासे ने जिम्मेवार व जवाबदेही अफसरों की कार्यकुशलता को दागदार बना दिया। जब सरिस्का की शान व पहचान बनाने वाले बाघ-बाघिनों का ही मर्डर हो रहा हैऔर उसका कई महिनों बाद पता तक नहीं लग पा रहा, तब सरिस्का के अन्य वन्य जीवों की आगे हिफाजत कैसे संभव है?
पकड़े गए बाघिन हत्या आरोपी ने भी पूछताछ में यह बात उगली है कि शिकारी सरिस्का इलाके में मौजूद नील गायों, सांभर आदि का भी शिकार करते आ रहे हैं। सरिस्का में अभी वर्तमान में 12 टाइगर व 5 शावक मौजूद हैं परन्तु इनकी पुख्ता सुरक्षा के प्रति अभी भी यदि जवाबदेही तय नहीं की गईतो उनकी सलामती पर आगे भी खतरे के बादल मंडरा सकते हैं। गुप्ता ने कहा है कि जरूरत इस बात की है कि बाघ-बाघिन, सांभर, मृग की तरह नील गायों को भी समान वन्य जीव समझते हुए सभी की सुरक्षा के बाबत जन सहभागिता से सक्रिय पहल हो ताकि सरिस्का की लाज बचाई जा सके। उसकी प्रतिष्ठा बरकरार रह पाए। प्रकृति ने जब सभी वन्य जीवों को समान रूप से जीने का हक दिया है, तब उसके साथ बेइंसाफी नहीं की जाए।
Published on:
08 Nov 2018 09:51 am
बड़ी खबरें
View Allअलवर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
