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10 साल में बीज के भाव दस गुना बढ़ गए, फसल का दाम डेढ़ गुना भी नहीं बढ़ा, किसानों को नहीं मिल रहा भाव

पिछले 10 सालों में बीज के दाम 10 गुना तक बढ़ गए, लेकिन किसानों को फसल के दाम लगभग पहले जितना ही मिल रहा है।

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अलवर

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Lubhavan Joshi

Jan 22, 2020

Seeds Price Increase Ten Times For Last 10 Years

10 साल में बीज के भाव दस गुना बढ़ गए, फसल का दाम डेढ़ गुना भी नहीं बढ़ा, किसानों को नहीं मिल रहा भाव

अलवर. पिछले एक दशक में किसान की फसल का भाव मुश्किल से डेढ़ गुना बढ़ा है जबकि हाइब्रिड बीज के भाव 10 गुना बढ़ चुके हैं। उदाहरण के तौर पर 2010 में टमाटर के बीज का भाव मुश्किल से 10 हजार रुपए प्रति किलो था। जो अब 2020 में 1 लाख रुपए किलो हो गया है। इसी तरह मिर्च, गोबी जैसी प्रमुख सब्जी की फसल का बीज भी 10 साल पहले केवल 8 हजार रुपए किलो से बढ़कर अब करीब 80 हजार रुपए प्रति किलो हो गया है।

यह सब खेल अन्तरराष्ट्रीय कम्पनियों का है। जो हाइब्रिड बता कर बीजों के भाव मनमाफिक बढ़ाने में लगी है। जिन पर सरकार का कोई अंकुश नहीं है, यही किसान की दयनीय हालत का यह एक बड़ा कारण है। ये महज कुछ सब्जी के उदाहरण है। अन्य फसलों के बीज के भाव भी बहुत तेजी से बढ़े हैं।

सरसों के बीज का भाव 700 रुपए किलो

अलवर व भरतपुर सहित राजस्थान भर में सरसों नकदी वाली फसल है। अकेले अलवर जिले में कई लाख हैक्टेयर जमीन में सरसों की पैदा होती है। दस साल पहले सरसों का बीज 100 रुपए प्रति किलो था, जो अब 700 रुपए प्रति किलो हो गया है। करीब सात गुना वृद्धि हो गई।

सरकार के हस्तक्षेप से भाव कम संभव

सरकार के हस्तक्षेप से बीजों के भाव कम करने संभव हैं। जिस तरह बीटी कॉटन का बीज 2010 में 1800 रुपए प्रति पैकेट बाजार में था, लेकिन किसानों की मांग पर सरकार ने हस्तक्षेप किया। इसके 10 साल बाद अब बाजार में बीटी कॉटन 700 रुपए प्रति पैकेट है। यह बड़ा सबूत है कि सरकार चाहे तो किसानों को खाद-बीज के बढ़ते भावों में कुछ राहत दे सकती है।

अनाज के भाव : केवल 700 रुपए बढ़े

किसान की प्रमुख फसल गेहूं है। 10 साल पहले गेहूं का भाव करीब 1 हजार रुपए प्रति क्विंटल था। जो पिछले साल ही किसाना का खेत में 1700 रुपए प्रति क्विंटल बिका है। हालांकि अब कुछ भाव बढ़े हैं लेकिन, अधिकतर किसानों को 1700 रुपए प्रति क्विंटल ही मिला है।

भूजल ने बढ़ाया बोझ

भूजल नीचे जाने से भी किसानों पर आर्थिक बोझ पड़ा है। पहले प्रति बीघा सिंचाई में एक घण्टा लगता था अब करीब चार घण्टे लगते हैं। जिससे किसानों पर बिजली व डीजल का भार पड़ा है। वैसे भी दस साल में डीजल के भाव भी दोगुना से अधिक हो चुके हैं।

बीज पर अंकुश लगे

बीटी कॉटन की तरह सरकार को बीज के भावों पर अंकुश लगाने की जरूरत है। सिंचाई, बीज, खाद अधिक महंगे हो गए। अनाज उनकी तुलना में कम बढ़े हैं। ऐसे में किसान पर मार पड़ रही है। मजदूरी व सिंचाई भी अधिक महंगी हुई है।
पंकज जोशी, संरक्षक, खाद-बीज संघ अलवर