
अलवर का शिमला है देश भर में वास्तुकला की अनूठी विरासत, गहराई होने के बाद भी नहीं भरता बारिश का पानी
अलवर. शहर के कम्पनी बाग स्थित शिमला देश भर में वास्तुकला की अनूठी कृति है। करीब 135 साल पहले अलवर के पूर्व शासक मंगलसिंह ने शहर के बीचों बीच स्थित कम्पनी बाग के मध्य में शिमला का निर्माण कराया था।
अलवर पूर्व राजपरिवार से जुड़े नरेन्द्र सिंह राठौड़ बताते हैं कि कम्पनी बाग उद्यान में शिमला का निर्माण अलवर के पूर्व शासक मंगलसिंह ने 1885 में कराया था। कम्पनी बाग में शिमला भूतल 25 फीट गहराई पर बना है और इसकी लम्बाई 380 फीट व चौड़ाई 288 फीट है। यह पुरानी वास्तुकला की कारीगरी की अनूठी मिसाल है। इसका नाम शिमला रखने का कारण यह रहा कि यहां जून की भीषण गर्मी में भी लोगों को शिमला जैसी ठण्डक का अहसास होता है। शिमला में पत्थर पर बनी धूप घड़ी (कम्पास) सूर्य की रोशनी से लोगों को समय का ज्ञान कराती है। कम्पनी बाग से शिमला में जाने के लिए चारों ओर सीढिय़ां बनी है।
वहीं ऊपर विशेष प्रकार की जाली तेज धूप व गर्मी में भी अंदर लोगों को ठण्डक देती है। शिमला के अंदर लगे रंगीन फव्वारें इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। अलवर जिले में आने वाले पर्यटकों के लिए यह किसी अजबू से कम नहीं लगता। इसकी खासियत है कि भूतल से 25 फीट गहराई में बने होने के बाद भी बारिश के दिनों में यहां पानी नहीं भरता। बारिश का पानी कहां और किस रास्ते से जाता है, इसके बारे में लोग अनजान है और गहराई के बावजूद पानी नहीं भरने से अचंभित हैं। फिलहाल शिमला के रखरखाव का जिम्मा यूआइटी के पास है और कम्पनी बाग की दुर्दशा का असर शिमला पर पड़े बिना नहीं रह सका है। अलवर जिले की ऐतिहासिक विरासत को सहेजने के लिए विभिन्न संगठन आवाज उठा चुके हैं, लेकिन अभी शिमला को उसका पुराना वैभव मिलने का इंतजार है।
Published on:
07 Dec 2020 11:28 am
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