कथा में छठें संत स्वामी सुदर्शनाचार्य ने कहा कि जो इंसान अपने मां-बाप और जन्म भूमि का सगा नहीं है, उसको भगवान तक अपनी शरण में नहीं रखते हैं। ऐसे में वह जीवन-मरण के बंधनों में चक्कर लगाता रहता है। कथा के दौरान संगीतमय भजनों पर श्रदालु अपने आपको झूमने से नहीं रोक पाए। यदि आप नया कारोबार शुरू कर रहे हैं तो अपने माता- पिता से कुछ रकम प्रतीकात्मक रूप में ले लीजिए और उनको तिजोरी में रख लें। इस पैसे में चाहे एक रुपया ही अपने कारोबार में मिलाएंगे तो कारोबार खूब चलेगा। माता- पिता को पहले भोजन खिलाने से सारे दोष समाप्त हो जाते हैं।