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अब इंसानों ने मगरमच्छ को भी नहीं छोड़ा, उनके इलाके पर भी जमा लिया कब्जा, देखिए सिलीसेढ़ के हाल

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अलवर

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Hiren Joshi

Dec 21, 2018

Siliserh Crocodiles : Encroachment On Island Of Crocodiles In Siliserh

अब इंसानों ने मगरमच्छ को भी नहीं छोड़ा, उनके इलाके पर भी जमा लिया कब्जा, देखिए सिलीसेढ़ के हाल

अलवर. प्रसिद्ध झील सिलीसेढ़ में मगरमच्छ के ठिकाने पर मछुआरों ने कब्जा कर लिया है, जिससे न केवल मछुआरों की जान को खतरा है बल्कि गुपचुप दूसरे खेल होने लगे हैं। मामले की शिकायत आरटीडीसी, सिंचाई विभाग, मत्स्य पालन विभाग व प्रशासन तक होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होने से मगरमच्छों की जान का खतरा कम नहीं हो सका है।

यही नहीं पानी में दूर तक मछली पकडऩे का जाल लगाने से पर्यटकों की जान को भी खतरा है। कई बार पर्यटकों की नाव में मछली पकडऩे का जाल फंस जाता है। जिससे मुश्किल नाव के गड़बड़ाने का खतरा रहता है। मछली पकडऩे का ठेका, मगरमच्छ बेघर सिलीसेढ़ में करीब एक करोड़ रुपए का मछली पकडऩे का ठेका दिया हुआ है। जिस फर्म को ठेका मिला उनके मछुआरों ने सिलीसेढ़ पाल के पास अपना ठिकाना डाल दिया। जहां हमेशा मगरमच्छ देखे जाते रहे हैं। खासकर सर्दी के मौसम में तो यह मगरमच्छ खुली जमीन में पड़े दिखते थे।

जब से यहां मछली पकडऩे वालों ने यहां अपना डेरा डाला है उसके बाद मगरमच्छों अपनी यह जगह छोडऩे का मजबूर हैं। तभी तो पिछले करीब दो माह से इस जगह पर किसी ने मगरमच्छों को देखा तक नहीं है। जबकि इससे पहले पाल पर खड़े होकर लोग आसानी से मगरमच्छ देखते रहे हैं।

दो फोटो में हो रही तस्वीर साफ

साल 2017 का फोटो आपके सामने हैं। जहां आप मगरमच्छ देख रहे हैं। यह वहीं जगह है जहां इस समय मछुआरों ने अपना ढेरा जमा लिया। इनके आने के बाद यहां अब मगरमच्छ नजर नहीं आ रहे हैं।

गुपचुप शिकार भी संभव

वन्यजीव प्रेमियों का मानना है कि लगातार मगरमच्छों के ठिकाने पर अनजान लोगों के ढेरा डालने से शिकार होने का डर भी रहता है। जो लोग लगातार मगरमच्छों के आसपास रह रहे हैं उनकी कोई रिकॉर्ड भी प्रशाासन के पास नहीं है। यही नहीं सिलीसेढ़ में मगरमच्छों की संख्या का कोई अधिकृत आंकड़ा नहीं है। शिकार होने के बाद यह पता भी नहीं चल सकेगा कि मगरमच्छ कहां गए।

तुरंत हटवाएंगे यहां से

वन्यजीवों को किसी तरह का व्यवधान नहीं होने दिया जाएगा। जिसको लेकर ठेकदार को सूचित कर दिया है। यहां से उनको ठिकाना हटवाया जा रहा है। सिवायचक जगह दी जाएगी। जहां से वे अपना काम कर सकेंगे।
विजेन्द्र,
मत्स्य पालन अधिकारी,
अलवर