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वजूद बचाने को सिलीसेढ़ संरक्षित झील घोषित जलदाय विभाग की बजाय नगर निगम करेगा रखवाली

प्रदेशभर की 23 झीलों को संरक्षित घोषित किया गया है। इसमें अलवर जिले की सिलीसेढ़ झील भी शामिल है। इस झील का वजूद बचाने व वैज्ञानिक प्रयासों से इसे पूरी तरह पुनर्जीवित करने के लिए इसका संचालन नगर निगम करेगा।

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प्रदेशभर की 23 झीलों को संरक्षित घोषित किया गया है। इसमें अलवर जिले की सिलीसेढ़ झील भी शामिल है। इस झील का वजूद बचाने व वैज्ञानिक प्रयासों से इसे पूरी तरह पुनर्जीवित करने के लिए इसका संचालन नगर निगम करेगा। इसके लिए संरक्षण प्लान तैयार किया जा रहा है, जिसे निदेशक राजस्थान झील विकास प्राधिकरण जयपुर से मंजूरी मिलेगी। सिलीसेढ़ झील अलवर से करीब 12 किमी दक्षिण-पश्चिम में स्थित है।

यह एक कृत्रिम झील है, जो 7 वर्ग किमी एरिया में फैली है। इसके तटबंध पर घने जंगल और स्मारक हैं। झील का अपना डूब व बहाव क्षेत्र है। बारिश में पानी की ज्यादा आवक से यह ओवरलो होती है। इस बार 28 फीट से ज्यादा पानी आया। इस झील के बहाव एरिया में होटल, रेस्टोरेंट से लेकर कई प्रतिष्ठान बन गए। झील के किनारे तक होटल पहुंच गए। ऐसे में झील का वजूद धीरे-धीरे खतरे में है। आकार भी इससे सिकुड़ रहा है। इन सभी चीजों से झील को बचाने के लिए ही संरक्षित घोषित किया गया है।

ये विभाग निभाएंगे भूमिका

नगर निगम इसका पूरा संरक्षण प्लान तैयार करवा रहा है। इसमें प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर जलदाय विभाग, पीडब्ल्यूडी के अधिकारी भी शामिल हैं। जलदाय विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि अब नगर निगम को ही झील का संरक्षण प्लान बनाना है। झील को बचाने के लिए समग्र प्रयास होंगे। राजस्थान झील प्राधिकरण अधिनियम 2015 की धारा 4 व 5 के अंतर्गत यह कार्य होगा।

इन झीलों का भी होगा संरक्षण

आनासागर झील, उदयसागर झील, कायलाना झील, कोलायत झील, गजनेर झील, गड़ीसर झील, जयसमंद, तलवाड़ा झील, दूध तलाई झील, नक्की झील, पचपदरा झील, पिछोला झील, पीथमपुरी झील, पुष्कर झील, फतेहसागर झील, फॉयसागर झील, मावठा सरोवर, रंगसागर झील, सांभर झील, स्वरूप सागर झील आदि को संरक्षित किया जाएगा।