
किसान के बेटे ने महान वैज्ञानिक के कथन को गलत साबित किया, धुएं से बनाई उर्जा, राष्ट्रपति कर चुके सम्मानित
अलवर. महान वैज्ञानिक केल्विन प्लांक का कथन है कि किसी भी इंजन से निकली गैस या धुएं को उर्जा में बदल पाना संभव नहीं है। लेकिन अलवर जिले के बहरोड़ के कांकर दोपा गांव निवासी सुभाष ओला ने ऐसा इंजन बना डाला जो गर्म भाप को उर्जा में बदल देता है। किसान के बेटे सुभाष ने 11वीं कक्षा में यह कथन पढ़ा था, उसके बाद उन्होंने 26 साल तक मेहनत की और वर्ष 2010 में ऐसा इंजन बनाया जो भाप को रिसाइकल कर उर्जा बचा रहा है। इस नवाचार को देखने के बाद भारत सरकार के नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन ने उन्हें सहयोग किया और सुभाष को राष्ट्रपति से अवार्ड भी मिला।
ईंधन और पानी की होती है बचत, प्रदूषण में भी कमी
सुभाष ओला के बॉयलर से ईंधन और पानी की काफी बचत होती है, वहीं प्रदूषण भी कमी आती है। यह बॉयलर पानी से निकली भाप को रिसाइकल कर उसी से उर्जा बनाता है। जिससे बार-बार ईंधन के उपयोग की आवश्यकता नहीं पड़ती। पानी की भी 90 प्रतिशत से अधिक बचत होती है। भाप को विशेष उपकरणों में गाढ़े पानी के साथ बॉयलर में प्रयोग किया जाता है। वर्ष 2014 में नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन ने उनके बॉयलर का टैस्ट किया। बॉयलर के उपयोग से ईंधन और पानी की काफी बचत हुई, जिससे वे हैरान रह गए। इसके बाद एनआइएफ ने उनका सहयोग किया।
दूध बेचकर धुएं को उर्जा में बदलने का कार्य किया
सुभाष ओला बताते हैं कि उन्होंने पढ़ाई छोड़कर दूध बेचा और इस तकनीक पर काम किया। उन्होंने शरुआत में अपने मावे के उद्योग में इस बॉयलर का परीक्षण किया। उन्होंने बताया कि 100 किलो दूध का मावा बनाने में 100 किलो लकड़ी का इस्तेमाल होता था, री साइक्लिंग बॉयलर मशीन से 100 किलो मावे में मात्र 13 किलो लकड़ी का ही उपयोग हुआ। वे 600 से ज्यादा बड़े प्लांट व 5 हजार से ज्यादा लघु उद्योगों में यह बॉयलर लगा चुके हैं।
स्टार्टअप ऑफ दी इयर 2022 का खिताब जीता
सुभाष ओला के बॉयलराें में उर्जा बचाने की तकनीक को अमेजॅन संभव उद्यमिता चैलेंज में स्टार्टअप ऑफ दी इयर में प्रथम पुरस्कार मिला है। इस पुरस्कार की दौड़ में देशभर के 240 शहरों के 2 हजार उद्यमी शामिल थे।
उनकी तकनीक को पहले खोया और अन्य दूध के उत्पाद तैयार करने के लिए विकसित किया गया था अब कपड़ा, दूध और भोजन, फार्मा, प्लाईवुड, पेपर मिल, चमड़ा उद्योग, रसायन उद्योग, गर्म पानी बॉयलर जनरेटर, प्लास्टिक रीसायकल, कपड़े धोने और अस्पतालों आदि क्षेत्रों में उपयोग हो रहा है।
Published on:
27 May 2022 05:34 pm
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