
सुनील जोधा : 26/11 हमले में आतंकियों से लोहा लेते वक्त सीने में लगी 7 गोलियां, एक गोली अभी भी सीने में फंसी हुई, लेकिन नहीं मिली सुविधाएं
अलवर . Sunil Jodha 26/11 : मुंबई में 26 नवंबर 2008 ( 26/11 ) को हुए हमले में कई बेकसूर लोगों ने जान गंवाई। आतंकियों से लोहा लेते हुए कई वीर जवान देश के लिए शहीद हो गए। देश उन्हें कभी भूल नहीं पाएगा। जब भी 26/11 हमले को याद करते हैं तो अलवर के जाबांज सुनील जोधा का पराक्रम याद आता है। आतंकियों से लोहा लेने वाले अलवर के जाबांज सुनील जोधा के सीने में आज भी वह गोली फंसी हुई है जो आतंकियों ने उन पर चलाई थी। होटल में फंसे करीब 40 लोगों को बाहर निकालने में योगदान देने वाले अलवर के कमांडों को 2009 में गेलेंटरी अवार्ड से सम्मानित किया गया। कमांडो सुनील जोधा के सीने में सात गोलियां लगी थी, जिसमें से एक गोली आज तक नहीं निकल पाई है। सर्दियों में हर दिन इस गोली की वजह से परेशानी उठानी पड़ती है। जोधा ने बताया कि 26/11 को मुंबई में हमला हुआ और उसके अगले दिन उन्होंने मेजर उन्नीकृष्णन के नेतृत्व में कमांडो ऑपरेशन शुरु किया।
सुबह 7 बजे कमांडो की टीम ने होटल में प्रवेश किया और छठी मंजिल पर 2 आतंकियों को ढेर कर दिया। होटल की दूसरी मंजिल पर 2 आतंकी छिपे हुए थे। वहां बिजली काटने के कारण अंधरा था। कमांडो के पास नाइट विजन डिवाइस थे। होटल के कमरे का दरवाजा तोड़ा गया तो उसके अंदर दो आतंकी थे। आतंकियों ने फायरिंग शुरु कर दी, कमांडो ने एक आतंकी को मार गिराया, जबकि दूसरा नीचे चला गया।
आतंकियों की 7 गोलियां सीने में लगी
सुनील जोधा को आतंकियों के आधुनिक हथियारों से चली सात गोलियां सीने में लगी। गोली लगने के बाद वो वहीं गिर गए और बिल्कुल भी मूवमेंट नहीं किया, जिससे दूसरे आतंकी को लगा कि वो मर चुका है। दूसरा आतंकी नीचे चला गया तो कमांडोज ने कवर फायरिंग देते हुए उन्हें अस्पताल पहुंचाया। वहां 7 दिन बार उसे होश आया। ऑपरेशन में छह गोलियां तो निकल गई, लेकिन एक गोली अभी भी उनके सीने में लगी हुई है, जो सर्दियों के दौरान काफी दर्द देती है।
सरकार से नहीं मिली मदद
हमले के इतने साल बीत जाने के बाद राजस्थान सरकार की ओर से सुनील जोधा को आज तक राज्य सरकार से मदद नहीं मिली है। केन्द्र सरकार ने गेलेंट्री अवार्ड से सम्मानित किया। वे राजस्थान के मुख्यमंत्री से मिलने की इच्छा जता रहे हैं।
सुविधाओं से महरूम है सुनील का गांव
सुनील जोधा अलवर के मुंडियाखेडा गांव के रहने वाले हैं। गांव आज भी सुविधाओं का मोहताज है। गांव में ना बिजली है ना पानी है, ना ही सडक़। गांव में आठवीं तक का स्कूल है, इसलिए गांव के मेधावी बच्चों को करीब 3 किलोमीटर दूर दूसरे गांव के स्कूल में जाना पड़ता है। जोधा को महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश की ओर से सम्मानित किया जा चुका है। 26 नवंबर 2008 को पाकिस्तान के आतंकियों ने मुंंबई के ओबराय व ताज होटल व नरीमन हाउस पर हमला कर दिया। आतंकियों को काबू करने के लिए ऑपरेशन ब्लैक कमांडो किया गया।
बच्चों को कराई ताज होटल की सैर
जिस समय यह हमला हुआ था उस समय कैप्टन जोधा के एक बेटे की उम्र मात्र 6 माह थी और दूसरे की 2 साल। बच्चे बहुत छोटे थे, पिता ने जो देश के लिए किया वो समझ नहीं सकते, लेकिन अब जब बच्चे 10 व 12 साल के हो चुके हैं तो वो इन्हें लेकर मुंबई के ताज होटल पहुंचे और वहां की सैर कराई।
Published on:
27 Nov 2019 12:16 pm
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