
Talab School Alwar : यह विद्यालय कभी पूरी तरह खंडहर था जो अब आकर्षक बन गया
शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार पूरे प्रदेश में मिसाल बने हुए हैं। अलवर जिले के राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय तालाब इसका जीता जागता उदाहरण है।
यह विद्यालय कभी पूरी तरह खंडहर था जो अब इतना आकर्षक बन गया है कि यह सेल्फी प्वाइंट बन गया है।
दो साल पहले ही इस स्कूल के भवन की हालत आम सरकारी स्कूलों से भी बदतर थी। कई वर्षों से खंडहर बने इस स्कूल के भवन को सुधाारने के लिए कई जन ्रप्रतिनिधियो के पास ग्रामीण गए लेकिन कोई परिणाम सामने नहीं आए।
इस स्कूल की दशा सुधारने का बीड़ा इस स्कूल की व्याख्याता संगीता गौड़ ने उठाया और इन्होंने इसके लिए सहगल फाउंडेशन से सम्पर्क किया। अब जैसे स्कूल का जीर्णोद्धार उनके लिए एक सपना बन चुका था ।और उनकी प्रबल इच्छाशक्ति,दृ? निश्चय, अदम्य साहस ने संगीता गौ? को सहगल फाउंडेशन अलवर से पुन: संपर्क करने के लिए मजबूर कर दिया।और अपने बार बार के प्रयास से वो राजेश लवानिया जी के सहयोग से वो सहगल फाउंडेशन संस्था को एक बार विद्यालय में लेकर आई।और ग्रामीणों ने एक निर्धारित राशि चंदे के रूप में जमा की और सहगल फाउंडश्ेान को यहां विकास कार्य करने के लिए बुलाया।
इस स्कूल के भवन का नक्शा अभियंता राजेश लवानिया ने तैयार किया ओर संगीता गौ? को इस कार्य के लिए लवानिया जी का सराहनीय सहयोग मिला और यह स्कूल बनकर तैयार हो गया। यहां के सरपंच का कहना कि वर्तमान में इस उपलब्धि से बच्चे और ग्रामीण बहुत उत्साहित हैं स्कूल के प्रधानाचार्य चंद्र प्रकाश मिश्रा का कहना है कि सुंदरीकरण के कार्य से बहुत खुश हैं उन्होंने इस कार्य में सहयोग करने वाले प्रत्येक शख्स का आभार जताया
इस विद्यालय में कई खूबियां-
विद्यालय का मुख्य गेट बहुत आकर्षक बनाया गया है ।
अंदर प्रवेश करते ही बायीं ओर की दीवार पर एक बच्चों विद्यालय गणवेश का चित्र विदाई और दीवार पर स्कूली छात्रा का विद्यालय गणवेश में चित्र बना ह,ै जिसे बच्चे देखकर आकर्षित होते है। विद्यालय में अत्याधुनिक चार टॉयलेट का निर्माण किया गया है। यहां प्राइवेट स्कूलों से बेहतर पेयजल और हाथ धोने की सुविधा बहुत व्यवस्थित तरीके से की गई है । यहां पानी की टंकी है जिसमे 20 नल लगाए गए हैं और सेरेमिक टाइल्स लगाकर एक आकर्षक कॉर्नर तैयार किया गया है ।
यहां सुसज्जित प्रिसीपल कक्ष जिसमें अत्याधुनिक सोफे टेबल अलमारी और कुर्सियां लगी हुई हैं। इस परिसर में गार्डन बनाया है जिसमें घास और दोनों ओर पौद्ये आकर्षण का क ेन्द्र हैं। विद्यालय के चारों तरफ पौधारोपण किया गया है और बच्चों को बैठने के लिए आकर्षक रंग बिरंगी कुर्सी बनी हंै यहां आई टी कक्ष जो की पूर्णतया कंप्यूटर से सुसज्जित और इसके नीचे ही बरसात के पानी के लिए बड़ा स्टोरेज निर्मित किया गया है । पानी के स्टोरेज के ऊपर कुर्सियों का निर्माण किया गया है।
इसमें हैं कई सुविधाएं-
विद्यालय के एक कोने में छात्राओं व निशक्तजन छात्र-छात्राओं और स्टाफ के लिए आधुनिक शौचालय निर्मित हैं जो व्लर्ड विजन इंडिया संस्था की ओर से बनवाया गया है । छात्राओं के शौचालय में विधुत इनसीनरेटर लगा है । यहां के दीवारेा पर आकर्षक चित्रकारी की गई है।एक कार्नर में ओपन क्लासरूम बनाया गया है।दूसरी साइड में सायकिल स्टैंड बनाया गया है
यह विद्यालय रियासत कालीन है । रियासत काल में चारों तरफ पानी भरा होने के कारण इसका नाम तालाब पड़ा। यहां पर सिंघाड़े की खेती होती है। विद्यालय की छत से तालाब का ऐतिहासिक बांध दिखाई देता है। पूरे भवन के बाहरी भाग पर तिरंगे की थीम पर स्प्रे पैंट किया गया है जिससे भवन आकर्षक लग रहा है।
इस विद्यालय को इस स्वरूप को देने में व्याख्यााता संगीता गौड़ का योगदान है जिनका कहना कि क्षतिग्रस्त भवन होने की मेरे मन में टीस थी लेकिन यह सब ग्रामीणों व स्टाफ के सहयोग से संभव हो सका है।
इसमें रतन गौड़, गोपी चंद शर्मा ,रामावतार शर्मा ,महेंद्र पटवारी ,भरत शर्मा ,हरिमोहन शर्मा ,जितेंद्र सोनी ,सरिता भारत, नरेश मीणा ,गोविंद कुमार शर्मा, राकेश खंडेलवाल आदि विद्यालय स्टाफ से दीपांकर जलुथरिया,रामकिशन सैनी,रामेश्व, शिवचरण शर्मा धर्मेंद्र अवस्थी, गिर्राज प्रसाद शर्मा आदि का सहयोग रहा
Published on:
09 Apr 2019 12:36 pm
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