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दा​खिला लेने के लिए कच्ची बस्ती के बच्चे परेशान, देखे वीडियो

बच्चों सरकारी स्कूल में भी दाखिला लेना है तो अभिलेख लाओ, अफसर भी कुछ नहीं कर पा रहे अलवर. जिले में 50 ऐसे भी बच्चे हैं जो दाखिले के लिए एक माह से स्कूल के चक्कर लगा रहे हैं। स्कूल प्रशासन की ओर से दस्तावेजों का हवाला दिया जा रहा है। यह स्कूल है जिला शिक्षा कार्यालय से तीन किलोमीटर दूर अंबेडकर नगर में। इसका नाम राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय देवखेड़ा है। अफसर भी बच्चों के दाखिले नहीं करवा पा रहे हैं।

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अलवर

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jitendra kumar

Aug 27, 2023

अलवर. जिले में 50 ऐसे भी बच्चे हैं जो दाखिले के लिए एक माह से स्कूल के चक्कर लगा रहे हैं। स्कूल प्रशासन की ओर से दस्तावेजों का हवाला दिया जा रहा है। यह स्कूल है जिला शिक्षा कार्यालय से तीन किलोमीटर दूर अंबेडकर नगर में। इसका नाम राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय देवखेड़ा है। अफसर भी बच्चों के दाखिले नहीं करवा पा रहे हैं।

राज्य सरकार शिक्षा को बढ़ावा दे रही है। कक्षा पांच तक के स्कूलों केा अंग्रेजी माध्यम बनाया जा रहा है। सरकार का पूरा फोकस है कि कोई भी बच्चा शिक्षा की मुख्यधारा से न छूटे। पढ़ाई का अधिकार हर बच्चे का है। सरकारी स्कूलों में हर बच्चे को दाखिल करना है। चाहे निजी स्कूल में दाखिले हों या न हों। यहां पढ़ाई के पर्याप्त बंदोबस्त की बात की जाती है। घुमंतू समाज के तमाम बच्चों के दाखिले करवाने के लिए एक संस्था आगे आई। उन्होंने शिक्षा विभाग के अफसरों को ज्ञापन दिया लेकिन बच्चों के दाखिले नहीं हुए। स्कूल ने भी हाथ खड़े कर दिए लेकिन दबाव चारों ओर से बना तो कुछ बच्चों को दाखिल करने की बात सामने आई लेकिन अभी भी कई बच्चे शिक्षा नहीं पा रहे हैं। वह दाखिले का इंतजार कर रहे हैं।

दाखिले हम करवाएंगे

सरकारी स्कूलों में बच्चों को दाखिले मिलेंगे। यदि किसी को नहीं मिल रहा है तो वह संबंधित विभाग में आए। दाखिले हम करवाएंगे।

— भूप सिंह नरुका, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी

अधिकतर बच्चों को दाखिला दिया

महात्मा गांधी स्कूलों में सरकार की ओर से अधिकतम 30 बच्चों को दाखिला दिया जाता है। लेकिन विद्यालय प्रशासन की ओर से इन बच्चों को भी दाखिला दिया जा रहा है। अधिकतर बच्चों को दाखिला दिया गया है। बाकी को भी जल्द देंगे।

सुरेश चंद शर्मा, प्रधानाध्यापक, देवखेड़ा स्कूल