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किसान आंदोलन का उद्योगों पर पडऩे लगा असर

ट्रांसपोर्ट व्यव्यस्था डगमगाने लगी
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अलवर

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Shyam Sunder Sharma

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Updated: 16 Dec 2020, 6:08 PM IST

किसान आंदोलन का उद्योगों पर पडऩे लगा असर

नीमराणा उद्योग क्षेत्र का परिदृश्य।

अलवर. केंद्र सरकार की ओर से लाए किसान बिलों के विरोध में विगत 19 दिनों से प्रस्तावित दिल्ली कूच आंदोलन के चलते हाइवे जाम से अब उद्योगो से जुड़ी ट्रांसपोर्ट व्यव्यस्था डगमगाने लगी है और इसका सीधा असर दिल्ली-जयपुर हाइवे पर शाहजंहापुर, घीलोथ , नीमराणा, बहरोड, सोतानाला व केशवाना आदि उद्योगों पर दिखने लगा है। कच्चा पक्का माल इधर-उधर नहीं आने-जाने से उद्योगों की उत्पादन व्यव्यस्था पर भी आंदोलन का असर पडऩा शुरू हो गया है।
बड़े उद्योगो के पास जहां बड़े स्तर पर कच्चा माल स्टॉक गोदाम व्यव्यस्था तो है। बताया जा रहा है उद्यमियों का ये स्टॉक भी बहुत लंबे समय नहीं चल सकता। कच्चा माल उपलब्धता निरन्तर रहने से ही उद्योग व्यव्यस्था चलती है। वहीं छोटे व लघु उद्यमियों की मानें तो उनके पास बड़ी पूंजी की कमी होती है और वे मोटा पैसा स्टॉक में न तो लगा सकते और नहीं बड़ी स्टॉक व्यव्यस्था रख सकते। ऐसे में हालात ये होंगे कि कच्चा व उत्पादित माल व्यव्यस्था को बरकरार रखने में उद्योगों की ट्रांसपोर्ट व्यव्यस्था सुचारु चलना जरूरी है। जबकि अब किसान आंदोलन की वजह से इस राह में रुकावट जो आ रही है। लंबे समय किसान आंदोलन चला तो अन्य सेक्टरों की बजाय उद्योग सेक्टर पर इसका बुरा असर पड़ेगा। सरकार को इसका हल जल्द निकालना चाहिए। वर्तमान में देखा जाए तो अनुमानत: उद्योगों का 30-35 फीसदी तो ट्रांसपोर्टेशन प्रभावित है।

कच्चे माल की आपूर्ति नहीं हो पा रही
वर्तमान में किसान आंदोलन से उद्योगों में कच्चे माल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है एवं उत्पादित माल को भेजने में काफी कठिनाइयां आ रही है। अगर किसान आंदोलन इसी तरह लंबे समय तक चलेगा तो उद्योगों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। सरकार किसानों द्वारा उठाई जा रही मांगो पर शीघ्र ही विचार कर निस्तारण करें ताकि हर क्षेत्र को एक भारी संकट से बचाया जा सके।
केके शर्मा , अध्यक्ष नीमराणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन