10 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

टहला मार्ग स्थित घाट में सुरंग बनाने का मामला विधानसभा में उठाया, अभी तक कोई अमल नहीं हो पाया…पढ़ें यह न्यूज

सुरंग बनाने से दुर्घटनाओं से मिलेगी निजात, यातायात का राजगढ़ से होगा सीधा जुड़ाव।

3 min read
Google source verification

राजगढ़. टहला-राजगढ़ सडक के मध्य स्थित घाट में सुरंग बनाकर यातायात सुगम बराए तो आए दिन हो रही दुर्घटनाओं से निजात मिल सकती है। साथ ही राजगढ़ से सीधा जुड़ाव भी होगा।

गौरतलब है कि घाट में सुरंग बनाने की मांग काफी अर्से से चली आ रही है, लेकिन इस ओर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। सूत्रों के अनुसार टहला मार्ग पर करीब 700 फीट ऊंचे पहाड पर होकर करीब नौ मोड़ का विकट रास्ता बनाया हुआ है। उक्त रास्ते में सुरक्षा दीवार बनाई गई है, जो जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इस घाट की लम्बाई करीब दो किलोमीटर की है। घाट को पार करने के लिए करीब 30 मिनट का समय लगता है। इसके विकट मोड़ के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती है।

टहला क्षेत्र में कई दर्जन मार्बल की खानें हैं। खानों से सैकडों की संख्या में ट्रक पत्थर भरकर इसी मार्ग से गुजरते हैं। आए दिन घाट में ट्रकों के पलटने तथा वाहनों के कमानी-पट्टे टूट जाने से मार्ग अवरूद्ध हो जाता है। टहला क्षेत्र की ग्राम पंचायतों के करीब पांच दर्जन से अधिक गांवों के लोग घाट में होकर यात्रा करते हैं, जिसके कारण परेशानी का सामना करना पड रहा है। इस घाट में सुरंग बना दी जाए तो पांच मिनट का समय लगेगा। इस सम्बंध में जनप्रतिनिधियों ने विधानसभा में घाट में सुरंग बनाने का मामला भी उठाया था, लेकिन इस पर अभी तक कोई अमल नहीं हो पाया है।

थानागाजी व सरिस्का पहुंचना होगा आसान

टहला मार्ग पर घाट के नीचे सुरंग बनने से जहां समय की बचत होगी, वहीं नारायणी धाम, पारासर धाम, नीलकण्ठ, कांकवाडी किला, अजबगढ, भानगढ आदि पर्यटन स्थलों पर जाने के लिए सुविधा मिल पाएगी। इसके अलावा सरिस्का बाघ परियोजना एवं थानागाजी क्षेत्र का सीधा जुडाव अलवर-सिकन्दरा मेगाहाईवे, एनएच हाईवे एवं रेलमार्ग से हो जाएगा। राजगढ से जयपुर जाने के लिए भी इस मार्ग का अच्छा उपयोग हो सकेगा। सरिस्का जाने के लिए मेगाहाईवे से करीब 43 किलोमीटर का सफर करना पड़ेगा।

यह बोले जानकार...अमल होनी चाहिए

पूर्व प्रधान पंचायत समिति राजगढ़ महन्त जयराम दास स्वामी का कहना है कि घाट में होकर सुरंग बनाने से थानागाजी, टहला तहसील क्षेत्र के सैकडों गांवों का राजगढ़ मेगा हाईवे एवं रेलमार्ग से सीधा जुडाव हो जाएगा। इस सम्बंध में पूर्व विधायक हेमसिंह भड़ाना, रमाकान्त शर्मा ने विधानसभा में सुरंग बनाने का मामला विधानसभा में भी उठाया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। इस पर अमल होनी चाहिए।

................

डेढ़ सौ गांवों के ग्रामीणों को फायदा होगा

पंचायत समिति सदस्य टहला राकेश खण्डेलवाल का कहना है कि घाट में सुरंग बनने से दुर्घटनाओं से निजात मिलने के साथ ही जंगली जानवरों की सुरक्षा होगी। वाहन चालकों को फायदा होने के साथ अवागमन सुगम होगा। सुरंग बनने से करीब डेढ़ सौ गांवों के ग्रामीणों को फायदा होगा। टहला क्षेत्र में पर्यटकों का आवागमन बढ़ेगा। घाट में सुरंग बनाने की मांग थानागाजी के विधायक कान्तिप्रसाद मीना रख चुके हैं।

...................

करीब 50 करोड़ की आवश्यकता होगी

सार्वजनिक निर्माण विभाग राजगढ़ सहायक अभियन्ता सविता मीना का कहना है कि यदि टहला घाट में सुरंग बना दी जाए तो दुर्घटनाओं व घाटी में रोड़ मरम्मत के होने वाले खर्च पर रोक लगेगी। घाट की लम्बाई करीब दो किलोमीटर है। घाट में सुरंग बनने के साथ ही घुमाव समाप्त जाएंगे और एक किमी दूरी कम होगी। सुरंग बनाने में करीब 50 करोड़ की आवश्यकता होगी। घाट में सुरंग बनाने का मुद्दा कई बार जनप्रतिनिधि विधानसभा में उठा चुके हैं।

घाट मार्ग के हालात व सुरंग बनने के फायदे

फायदा - दुर्घटनाओं में कमी के साथ यातायात होगा सुगम

समस्या - टहला मार्ग पर करीब 700 फीट ऊंचे पहाड पर होकर करीब नौ मोड़ का विकट रास्ता बना हुआ है।

अनदेखी - सुरक्षा दीवार जगह-जगह से क्षतिग्रस्त।

परेशानी - घाट की लम्बाई करीब दो किमी, इसे पार करने में लग रहे 30 मिनट।

विशेष बात - टहला क्षेत्र में कई दर्जन मार्बल की खानें हैं। यहां से सैकडों की संख्या में ट्रक पत्थर भरकर इसी मार्ग से गुजरते हैं।

दिक्कत - आए दिन घाट में ट्रकों के पलटने तथा कमानी-पट्टे टूटने से होता है मार्ग अवरूद्ध।

जुड़ाव - करीब पांच दर्जन से अधिक गांवों के लोगों का इस मार्ग से जुड़ाव।

यह होगी राहत - सरिस्का जाने के लिए मेगाहाईवे से करीब 43 किमी का ही सफर। अन्य धार्मिक व पयर्टन स्थलों पर पहुंच होगी आसान

लागत - सुरंग बनाने में करीब 50 करोड़ की आवश्यकता होगी।

कवायद - घाट में सुरंग बनाने का मुद्दा कई बार जनप्रतिनिधि उठा चुके विधानसभा में, पर अमल नहीं।