
अलवर. अलवर जिले के कोटकासिम में भारत सरकार के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई केरोसिन सब्सिड़ी योजना के आश्चर्यजनक परिणाम के बावजूद जिले में बड़े पैमाने पर केरोसिन की कालाबाजारी हो रही है।
जिले में अब भी आधे से अधिक परिवार एेसे हैं, जिनके पास गैस कनेक्शन नहीं हैं और वे स्टोव आदि पर भोजन पका रहे हैं। इनके लिए प्रतिमाह लगभग 2 हजार केएल यानि 2 करोड़ लीटर केरोसिन का वितरण हो रहा है। सुनने में भले ही यह आश्चर्यजनक लगे, लेकिन रसद विभाग के आंकड़ों के अनुसार यह सच है।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की बेवसाइट के अनुसार अलवर जिले में 10 लाख 52 हजार 593 राशनकार्ड धारी हैं। इनमें से लगभग 6 लाख राशनकार्डधारी एेसे हैं, जिनके गैस कनेक्शन नहीं हैं। इन्हें हर माह 3 लीटर प्रति कार्ड की दर से केरोसिन का वितरण हो रहा है।
गैस एजेन्सी के आंकड़े कर रहे चुगली
अलवर जिले में लगभग 7 लाख हाउस होल्ड (परिवार) हैं। इनमें से लगभग 5 लाख के पास गैस कनेक्शन हैं और केवल 2 लाख परिवार गैस से वंचित हैं। इस हिसाब से जिले में केरोसिन की आवश्यकता निकालें तो यह केवल 600 केएल आती है।
एेसे में सवाल यह है कि बाकी 1400 केएल यानि 1 करोड़ 40 लाख लीटर केरोसिन कहां जा रहा है?
काम नहीं आए प्रयास
कोटकासिम की सफलता के बाद सरकार को यह योजना अलवर सहित पूरे प्रदेश में लागू करनी थी, लेकिन एेसा नहीं हुआ।
इसकी जगह सरकार ने पॉश मशीन के माध्यम से केरोसिन का वितरण शुरू कराया, लेकिन इसकी भी लोगों ने गली निकाल ली।
ट्रैक्टरों में हो रहा इस्तेमाल
सच्चाई यह है कि उपभोक्ताओं के नाम पर आवंटित केरोसिन ज्यादातर कालाबाजारी में काम आ रहा है। पेट्रोल व डीजल से काफी सस्ता होने के चलते लोग इसका उपयोग ट्रैक्टर चलाने व खेतों में लगे पम्प व मशीनों को चलाने में कर रहे हैं।
वहीं, कुछ इलाकों में इसे पेट्रोल व डीजल में मिलाकर भी बेचा जा रहा है। एेसा नहीं है कि केरोसिन की कालाबाजारी से विभाग अनभिज्ञ है।
विभाग ने पिछले साल अनियमितता मिलने पर एक दर्जन से अधिक राशन डीलरों के प्राधिकार पत्र निलम्बित किए। इस वित्तीय वर्ष में भी लगभग 67 डीलरों के प्राधिकार पत्र निलम्बित किए गए। इसके बाद भी केरोसिन की कालाबाजारी थम नहीं रही है।
कोटकासिम में सब्सिडी योजना के बाद भी नहीं चेते
केरोसिन की कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने अलवर के कोटकासिम में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में केरोसिन सब्सिडी योजना शुरू की।
इसके तहत केरोसिन के पात्र उपभोक्ताओं को बाजार दर पर (लगभग डीजल की रेट के बराबर) केरोसिन दिया गया। सरकारी दर पर केरोसिन के बाद डिफरेंस राशि उपभोक्ताओं के खाते में जमा कराई गई। इससे कोटकासिम में केरोसिन उपभोग की कलई खुल गई।
एक-दो माह बाद स्थिति यह हो गई कि राशन दुकानों पर केरोसिन लेने कोई नहीं पहुंचा और जहां पहले प्रतिमाह 84 केएल का उठाव था, वहां धीरे-धीरे उठाव जीरो केएल पर पहुंच गया।
यह कहते हैं खाद्य मंत्री
राज्य के खाद्या मंत्री बाबू लाल वर्मा का कहना है कि सरकार गेहूं व केरोसिन की कालाबाजारी रोकने के लिए लगातार प्रयासरत है। अलवर में यदि आधे से ज्यादा कार्डधारियों को केरोसिन मिल रहा है और गैस कम्पनी व विभाग के आंकड़ों में अन्तर है। तो इसे दिखवाया जाएगा।
Published on:
23 Feb 2017 09:03 am
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