अलवर. चंडीगढ़ हो या फिर जयपुर। लखनऊ से लेकर भोपाल के रेलवे स्टेशन के सामने नजारा कुछ अलग है। सब कुछ व्यविस्थत है पर यहां दिनभर स्टेशन के सामने जाम के हालात रहते हैं। राजस्थान पत्रिका ने इसका अध्ययन किया तो पाया कि बिजलीघर चौराहे की ओर जा रहा मार्ग संकरा है जबकि दूसरी ओर डाक बंगला साइड का रास्ता चौड़ा है। संकरे मार्ग की राह में रेलवे के कुछ क्वार्टर व एक दीवार बाधा बनी है।
अलवर. चंडीगढ़ हो या फिर जयपुर। लखनऊ से लेकर भोपाल के रेलवे स्टेशन के सामने नजारा कुछ अलग है। सब कुछ व्यविस्थत है पर यहां दिनभर स्टेशन के सामने जाम के हालात रहते हैं। राजस्थान पत्रिका ने इसका अध्ययन किया तो पाया कि बिजलीघर चौराहे की ओर जा रहा मार्ग संकरा है जबकि दूसरी ओर डाक बंगला साइड का रास्ता चौड़ा है। संकरे मार्ग की राह में रेलवे के कुछ क्वार्टर व एक दीवार बाधा बनी है। एक्सपर्ट कहते हैं कि ये बाधा हट जाए तो प्रतिदिन हजारों से ज्यादा लोगों को राहत मिले। जाम से मुक्ति मिले। इसके लिए जिला प्रशासन से लेकर यूआईटी को कदम उठाने होंगे।
रेलवे स्टेशन के सामने से तीन मार्ग निकल रहे हैं। एक रास्ता डाक बंगला साइड होते हुए सीधे कालीमोरी निकल रहा है। दूसरा रास्ता इसी के पास से अधिकारी आवासों की ओर निकलकर नेहरू पार्क की ओर गया है। तीसरा मार्ग बिजलीघर चौराहे वाला है। दो साइड में सड़क 50 फीट से ज्यादा है, डाक बंगला साइड से वाहन आसानी से निकल रहे हैं लेकिन जैसे ही वाहन बिजलीघर चौराहे की ओर जाते हैं तो रेलवे के क्वार्टर के कोने में बनी दीवार आड़े आ जाती है। वाहनों की अधिकता के यहां जाम लग जाता है। सुबह नौ बजे से 11 बजे तक और फिर तीन बजे से लेकर रात आठ बजे तक जाम जैसे हालात रहते हैं।